उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की मतगणना के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चंदौली से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने वाराणसी में चल रही मतगणना को लेकर प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मतगणना में उनके प्रत्याशी के साथ पक्षपात किया जा रहा है।
वीरेंद्र सिंह ने कहा, “हम लोग भी चुनाव लड़े हैं। आरओ की जिम्मेदारी होती है कि हर राउंड की गिनती के बाद सभी प्रत्याशियों की संतुष्टि के बाद एक चार्ट जारी किया जाए और उसे वेबसाइट के जरिए चुनाव आयोग तक पहुंचाया जाए, ताकि पता चले कि पहले राउंड में कौन सा प्रत्याशी कितने मतों से आगे है।”
उन्होंने बताया कि वाराणसी में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा पहले राउंड में लगभग डेढ़ हजार वोटों से और दूसरे राउंड में भी लगभग इतने ही वोटों से आगे चल रहे हैं। दो राउंड की गिनती में लगभग 28 हजार वोट गिने जा चुके हैं, जिसमें आशुतोष सिन्हा करीब 3 हजार वोटों से आगे हैं। इस आंकड़े को वेबसाइट पर नहीं डाला जा रहा है, जिससे एक आशंका पैदा हो रही है। यहां जो चुनाव अधिकारी हैं, जो मतगणना अधिकारी हैं, वे सरकार के दबाव में यह घोषणा नहीं कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि जब वे इकट्ठा घोषणा करेंगे तो आंकड़ों में हेराफेरी करेंगे और सरकार के दबाव में परिणाम बदलने की कोशिश करेंगे।
सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं में इसको लेकर भारी आक्रोश है और अगर इस तरह की कोई आशंका सच साबित हुई तो कार्यकर्ता आंदोलन के मूड में हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और चुनाव आयोग की होगी। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने अखिलेश यादव द्वारा चुनाव आयोग की आलोचना और एमएलसी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए।
उदयवीर सिंह ने कहा, “जब चुनाव की मतगणना के दौरान अंदर हमारे उम्मीदवार के कपड़े फाड़ दिए जाएं। पढ़ा-लिखा, बेचारा शिक्षक, व्यापारी वर्ग से आने वाला व्यक्ति, जिसका कोई आक्रामक भाषण भी न होता हो, ऐसे व्यक्ति के साथ अगर पुलिस-प्रशासन, एआरओ की मौजूदगी में, क्लोज डोर सीसीटीवी कवरेज में इस तरह की घटना हो, तो आप क्या कहेंगे? इससे साफ है कि प्रशासन निष्पक्ष नहीं है। वह मानसिक दबाव बना रहा है ताकि किसी तरह फ्रस्ट्रेट होकर उम्मीदवार मतगणना छोड़कर चला जाए।”
उन्होंने कहा कि इतने दबाव, प्रभाव और सरकारी मशीनरी के हमले के बाद भी समाजवादी पार्टी को जो समर्थन मिल रहा है, वह ऐतिहासिक है। ऐसे वर्गों और ऐसी जगहों से समर्थन मिल रहा है, जहां पहले सपा को इतना समर्थन नहीं मिलता था। जो लोग जीते हैं, वे पिछली बार से कई गुना ज्यादा, ऐतिहासिक वोटों से जीते हैं। जहां पार्टी पीछे भी है, वहां मुकाबला बेहद करीबी है और पक्षपात को झेलते हुए भी कार्यकर्ता डटा हुआ है।
उदयवीर सिंह ने कहा, “अगर यह वोटिंग मशीन से होती तो आप कुछ भी हेर-फेर करते, एक बटन दबाते और रिजल्ट सामने आता और कहते यही रिजल्ट है। अब बैलेट से है तो एक-एक बैलेट पर लड़ना पड़ेगा। अगर कोई बैलेट खारिज करना है तो बताना पड़ेगा कि किस कारण से खारिज किया गया। अगर कुछ अप्रत्याशित होता है तो कार्यकर्ता संघर्ष कर सकते हैं, पूछ सकते हैं। इसलिए इस चुनाव ने साबित किया है कि चुनाव बैलेट से होना चाहिए, ताकि अगर सरकार बेईमानी भी करे तो वह दिखे। भले ही उम्मीदवार हार जाए लेकिन जनता को पता तो चले कि चुनाव बेईमानी से जीता गया है।”
लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी विधान परिषद चुनावों में धांधली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा जिस तरह से चुनावी धांधली, हेराफेरी और अन्य गलत तरीकों का इस्तेमाल करती है, वह विधान परिषद चुनावों में साफ तौर पर देखा गया।”
उन्होंने कहा कि जब भाजपा जनता के समर्थन से चुनाव नहीं जीत पाई तो उसने पैसे और बाहुबल का सहारा लिया और चुनावों के दौरान सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया। अब इंडिया गठबंधन और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए पुलिस-प्रशासन का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। जनता भाजपा की इन हरकतों का कड़ा जवाब देगी। आने वाले दिनों में भाजपा के गलत आचरण, जिसमें ज्ञानेश कुमार के साथ मिलीभगत और सरकारी व प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग शामिल है, का जनता करारा जवाब देगी।

