August 28, 2026
National

एमएमडीआर बिल पर झारखंड के वित्त मंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच लेटर वार, खनिज राजस्व पर छिड़ी बहस

‘War of letters’ between Jharkhand’s Finance Minister and the Leader of the Opposition over the MMDR Bill; debate erupts over mineral revenue.

झारखंड में खनिज संपदा और उससे होने वाले राजस्व को लेकर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी आमने-सामने आ गए हैं। किशोर ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित एमएमडीआर संशोधन को राज्य के आर्थिक हितों के लिए नुकसानदायक बताते हुए मरांडी को पत्र लिखा था।

इसके जवाब में मरांडी ने राज्य सरकार की खनन नीति और वित्तीय प्रबंधन पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने विधानसभा से विधेयक पारित कर खनन क्षेत्रों में सेस लगाने की व्यवस्था की है। इससे वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 14,000 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान था।

उनका दावा है कि एमएमडीआर कानून में प्रस्तावित संशोधन और उसमें धारा 9डी जोड़े जाने से राज्य इस संभावित राजस्व से वंचित हो सकता है। वित्त मंत्री ने यह भी आशंका जताई थी कि संशोधन का असर विभिन्न कोयला कंपनियों पर झारखंड की करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली पर पड़ सकता है। उन्होंने पत्र में खनन से जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों का भी उल्लेख किया।

किशोर ने कहा कि खनन से आर्थिक लाभ केंद्र को मिलता है, जबकि झारखंड को विस्थापन, जमीन से बेदखली, प्रदूषण, खराब सड़कों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मरांडी से राज्य के हित में इस मुद्दे पर आवाज उठाने का आग्रह किया था। मरांडी ने अपने जवाब में कहा कि एमएमडीआर संशोधन किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में समान रूप से लागू होगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संशोधन पूरे देश के लिए है तो इससे केवल झारखंड की सरकार को परेशानी क्यों हो रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र से राज्य का जायज हक मांगना गलत नहीं है, लेकिन राज्य के राजस्व नुकसान के लिए पूरी तरह केंद्र को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने खनिज पर लगाए गए सेस को लेकर राज्य सरकार की नीति पर सवाल उठाया।

मरांडी के मुताबिक, पिछले वर्ष सेस से करीब 7,500 करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसी दौरान खनन रॉयल्टी बजट अनुमान के 22,000 करोड़ रुपये के मुकाबले घटकर करीब 16,000 करोड़ रुपये रह गई। उन्होंने दावा किया कि कोयले पर 450 रुपये और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त उपकरण लगाए जाने से झारखंड के वैध खनिज बाजार में अप्रतिस्पर्धी हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि इससे खनन और इससे जुड़े कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है तथा सिंहभूम क्षेत्र में कई खदानें और आयरन क्रशर बंद पड़े हैं। मरांडी ने दावा किया कि इससे स्थानीय मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हुआ है। मरांडी ने खनिज राजस्व बढ़ाने के लिए खदानों की नीलामी और उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए ओडिशा का उदाहरण दिया।

उन्होंने दावा किया कि ओडिशा ने बड़ी संख्या में खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर कई खदानों को चालू किया और इससे उसे पिछले कुछ वर्षों में करीब 87,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। इसके विपरीत झारखंड में कई लौह अयस्क खदानों के बंद होने और केंद्र द्वारा दिए गए कुछ कोल ब्लॉक के चालू नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि खदानों की नीलामी और उत्पादन बढ़ाकर झारखंड हर साल 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त कमा सकता था।

नेता प्रतिपक्ष ने सेस की दर को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा में अतिरिक्त उपकर नहीं है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह करीब 22.50 रुपये प्रति टन है। ऐसे में झारखंड में कोयले और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन तक उपकर लगाने से पहले क्या सरकार ने पड़ोसी राज्यों की नीतियों का तुलनात्मक अध्ययन किया था। मरांडी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित एमएमडीआर संशोधन प्रमुख खनिजों पर लागू है और लघु खनिजों पर इसका असर नहीं होगा।

उन्होंने राज्य में बालू घाटों और पत्थर खदानों की नीलामी में कथित देरी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इससे होने वाले राजस्व नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। मरांडी ने दावा किया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विभागों ने कुल बजट का एक प्रतिशत भी खर्च नहीं किया। उन्होंने उपयोगिता प्रमाण पत्र, निकाय चुनाव और राज्य वित्त आयोग के गठन में कथित देरी के कारण केंद्रीय अनुदान के नुकसान का भी आरोप लगाया।

Leave feedback about this

  • Service