छत की मुंडेर पर खड़ी वो लड़की आसमान की ओर निहारकर खुद से सवाल करती हुई कह रही है कि कब आएगा मेरा दूल्हा राजा…? आसमान की तरफ इसलिए, क्योंकि हर दूल्हे की तरह उसका दूल्हा किसी गाड़ी या रेलगाड़ी से नहीं, बल्कि हेलीकॉप्टर से आ रहा है। ऐसे में उसकी आतुरता का चरम पर होना लाजिमी है।
यह आतुरता अगर दुल्हन तक ही सीमित रहती, तो शायद आज यह इतना चर्चा का विषय न बनता। यह आतुरता आज राजस्थान के अलवर के हर शख्स में है। हर शख्स उस पल का इंतजार कर रहा है कि कब वो घड़ी आएगी, जब दूल्हा अपनी दुल्हन को हेलीकॉप्टर से लेने आएगा। इस मंजर का गवाह बनने के लिए शादी स्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं।
दूल्हे कृष्ण की बात करें, तो वह हेलीकॉप्टर लेकर अपनी दुल्हन को लेने रवाना हो चुका है, तैयारी पूरी हो चुकी है। हेलीकॉप्टर में चढ़ने से पहले दूल्हे से जुड़े हर खास पल को तस्वीरों में कैद किया गया, ताकि अगर कभी उसे अतीत में जाकर अपनी शादी से जुड़े संस्मरणों को याद करना हो, तो वो इन तस्वीरों को देखकर सुखद अनुभव का एहसास कर सके।
दूल्हे के पिता मुकेश ने भी इस पल को अपनी जिंदगी का खास पल बताया। उन्होंने कहा कि दूल्हे के दादा की दिली ख्वाहिश थी कि जब उनके पोते की शादी हो, तो वो किसी गाड़ी या रेलगाड़ी से नहीं, बल्कि हेलीकॉप्टर से अपनी दुल्हन को लेने जाए। इसी को देखते हुए मैंने फैसला कर लिया था कि जिस दिन भी अपने बेटे की शादी करूंगा, उस दिन ऐसी व्यवस्था करूंगा कि वह हेलीकॉप्टर से अपनी दुल्हन को लेने जाए। आज यह मेरी जिंदगी का सबसे खास पल है कि वो मेरा हेलीकॉप्टर से अपनी दुल्हन लेने जा रहा है। मैं सच में बहुत खुश हूं। मैं अपनी खुशी को बयां नहीं कर सकता।
दूल्हे के पिता ने बताया कि अभी मेरे बेटा पढ़ाई कर रहा है और दुल्हन भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं। अगर मैं खुद की बात करूं, तो मैं ठेकेदार हूं। वहीं, दुल्हन के पिताजी व्यापारी हैं। इस खास मौके पर दोनों ही परिवारों में खुशी का माहौल है।

