February 20, 2026
National

पश्चिम बंगाल : खड़गपुर सदर में कोई पार्टी लगातार दो बार नहीं जीत पाई, 2011 से त्रिकोणीय मुकाबला जारी

West Bengal: No party has won Kharagpur Sadar twice in a row, a three-way contest has been going on since 2011.

खड़गपुर सदर पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित एक जनरल कैटेगरी का विधानसभा क्षेत्र है। यह मेदिनीपुर लोकसभा सीट के सात विधानसभा हिस्सों में से एक है।

यह क्षेत्र दो प्रमुख वजहों से देशभर में प्रसिद्ध है, जिनमें से एक यहां स्थित भारत का पहला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी खड़गपुर), जो विज्ञान, इंजीनियरिंग और रिसर्च का प्रमुख केंद्र है। वहीं, दूसरा विश्व के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्मों में से एक वाला खड़गपुर रेलवे जंक्शन, जो पूर्वी भारत के साथ-साथ पूरे देश की यात्री और माल ढुलाई का महत्वपूर्ण केंद्र है।

खड़गपुर सदर का चुनावी इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। नाम और सीमाओं में बार-बार बदलाव हुए हैं। 1951 में यह खड़गपुर नाम से अस्तित्व में आया। 1957 में खड़गपुर लोकल (दो सदस्यीय) बना, जो 1962 में एकल सीट हो गया। 1977 में खड़गपुर लोकल समाप्त कर खड़गपुर रूरल और खड़गपुर अर्बन दो नई सीटें बनीं। 2009 के परिसीमन के बाद 2011 से वर्तमान खड़गपुर सदर (शहरी) अस्तित्व में आया, जिसमें सभी वोटर खड़गपुर म्युनिसिपैलिटी और खड़गपुर I ब्लॉक के रेलवे सेटलमेंट क्षेत्र से हैं।

अगर चुनावी इतिहास की बात करें तो पुराने दौर में (1951-1972) कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की, जबकि सीपीआई (एम) ने तीन बार। 1977-2006 तक कांग्रेस ने छह बार जीत हासिल की, जबकि जनता पार्टी ने 1977 में एक बार जीता। 2011 से स्थिति बदल गई। कोई पार्टी लगातार दो चुनाव नहीं जीत पाई।

2011 में कांग्रेस के ज्ञान सिंह सोहनपाल ने सीपीआई (एम) के अनिल कुमार दास को 32,369 वोटों से हराया (तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन था)। 2016 में भाजपा के दिलीप घोष ने सोहनपाल को 6,309 वोटों से हराया, तृणमूल तीसरे स्थान पर रही। 2019 उपचुनाव (दिलीप घोष लोकसभा चुने जाने पर) में तृणमूल के प्रदीप सरकार ने भाजपा के प्रेम चंद्र झा को 20,853 वोटों से हराया। 2021 में भाजपा के हिरण चटर्जी ने प्रदीप सरकार को 3,771 वोटों से हराया।

लोकसभा सेगमेंट में भाजपा ने 2014 के बाद मजबूत पकड़ बनाई। 2024 लोकसभा में भाजपा ने तृणमूल पर 21,906 वोटों की बढ़त बनाई (2019 में 45,132 थी)। लेफ्ट फ्रंट की मौजूदगी अब करीब 5 प्रतिशत तक सिमट गई है। 2024 में रजिस्टर्ड वोटर 2,39,710 थे।

यहां की जनसांख्यिकी विविध है, यही कारण है कि यहां पर कोई एक समुदाय निर्णायक नहीं। क्षेत्र पूरी तरह शहरी है, जिसमें रेलवे टाउनशिप, आईआईटी कैंपस और म्युनिसिपल एरिया शामिल हैं। इकोनॉमी रेलवे, आईआईटी से जुड़ी गतिविधियां, और छोटे-मध्यम उद्योगों पर निर्भर है। कांग्साबती नदी उत्तर-पूर्व में बहती है। कोलकाता 120 किमी, मेदिनीपुर 14 किमी, झारग्राम 45 किमी दूर हैं। हाईवे और रेल से अच्छी कनेक्टिविटी इसे क्षेत्रीय हब बनाती है।

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