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पश्चिम बंगाल: पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस, भ्रष्टाचार का आरोप

West Bengal: Red Corner Notice against stone quarry operator Tulu Mondal; accused of corruption.

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। तुलु मंडल पर तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप हैं। फिलहाल पुलिस को उसका कोई सुराग नहीं मिला है।तुलु मंडल के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और जांच एजेंसियां उससे पूछताछ करना चाहती हैं। उसके फरार होने के कारण पुलिस ने अदालत का रुख किया था।

सोमवार को सरकार ने तुलु मंडल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए आवेदन दाखिल किया था। बीरभूम जिले की सूरी अदालत ने मंगलवार को इस आवेदन को मंजूरी दे दी। सरकारी वकील विभास चटर्जी ने बताया कि तुलु मंडल को शुक्रवार, 14 अगस्त तक अदालत में पेश होने का समय दिया गया है। यदि वह तय समय के भीतर पेश नहीं होता है, तो उसे घोषित अपराधी माना जाएगा।

हाल ही में बीरभूम जिले के मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र के देउचा गांव में तुलु मंडल के रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से पुलिस ने 28.5 करोड़ रुपए नकद बरामद किए थे। इसके अलावा करीब 15 किलोग्राम सोना भी मिला था। इसके बाद से ही जांच एजेंसियों ने तुलु मंडल पर निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस उसकी संपत्तियों का पता लगाने के लिए लगातार छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है। उसके विभिन्न ठिकानों के अलावा रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के घरों पर भी जांच की जा रही है।

सरकारी वकील ने कहा कि यदि तुलु मंडल अदालत में पेश नहीं होता, तो उसे घोषित अपराधी करार दिया जाएगा। इसके बाद उसकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। तुलु मंडल पर आरोप है कि उसने पिछले पांच वर्षों में करीब 3,000 करोड़ रुपए के राजस्व की चोरी की है। सोमवार को पुलिस ने तुलु मंडल के रिश्तेदार रिपोन मंडल को गिरफ्तार किया था। जांचकर्ताओं ने पूर्व बर्दवान जिले के आउसग्राम स्थित उसके घर पर छापा मारा था। उसे मंगलवार को सूरी अदालत में पेश किया गया।

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपियों, शेख रियाजुल इस्लाम और शेख नूर आलम को भी अदालत में पेश किया और उनकी हिरासत की मांग की। अदालत ने तीनों आरोपियों को 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इन सभी के नाम कथित पत्थर सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं।

आरोपियों के वकील ने दलील दी कि केवल उनके मुवक्किलों को ही इस मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उस समय प्रशासनिक पदों पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

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