N1Live National अल्ट्रावॉयलेट लाइट क्या है? जानिए इसका विज्ञान और सूरज से आने वाली किरणों का रहस्य
National

अल्ट्रावॉयलेट लाइट क्या है? जानिए इसका विज्ञान और सूरज से आने वाली किरणों का रहस्य

What is ultraviolet light? Learn about its science and the secrets of the sun's rays.

17 मार्च । अल्ट्रावॉयलेट लाइट, जिसे पराबैंगनी (यूवी) किरणें भी कहा जाता है, एक विशिष्ट प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंग है। इसकी तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) दिखाई देने वाली रोशनी (दृश्य प्रकाश) से कम होती है, जिस कारण यह मानवीय आंखों के लिए अदृश्य होती है। हालांकि, प्रकृति में मधुमक्खियों और भंवरों जैसे कुछ जीवों में इसे देखने की अद्भुत क्षमता होती है।

यूवी लाइट का विज्ञान न केवल हमारी त्वचा की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि ब्रह्मांड की गहराइयों को समझने में भी मदद करता है। सूरज की रोशनी में मौजूद ये अदृश्य किरणें जीवन के लिए जरूरी हैं, लेकिन ज्यादा संपर्क में आने से नुकसान भी पहुंचाती हैं। वैज्ञानिक लगातार इनका अध्ययन कर रहे हैं ताकि ब्रह्मांड और पृथ्वी दोनों को बेहतर समझ सकें।

सूरज यूवी लाइट का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। सूरज से निकलने वाली यूवी किरणों को वैज्ञानिक मुख्य रूप से तीन भागों में बांटते हैं यूवी-ए, यूवी-बी और यूवी-सी। इनमें यूवी-सी सबसे खतरनाक होती है, लेकिन पृथ्वी का वायुमंडल इन्हें लगभग पूरी तरह सोख लेता है। यूवी-बी किरणें सनबर्न का कारण बनती हैं और जीवों के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती हैं। अच्छी बात यह है कि ओजोन परत लगभग 95 प्रतिशत यूवी-बी किरणों को रोक लेती है। यूवी-ए किरणें सबसे लंबी तरंग वाली होती हैं और ये त्वचा में गहराई तक पहुंचकर उम्र बढ़ने का कारण बन सकती हैं।

एस्ट्रोनॉमर यूवी लाइट को और बारीक भागों में बांटते हैं, जैसे नियर यूवी (एनयूवी), मिडिल यूवी (एमयूवी), फार यूवी (एफयूवी) और एक्सट्रीम यूवी (ईयूवी)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) अंतरिक्ष यान ने सूरज की एक्सट्रीम यूवी इमेज ली है। इन फॉल्स-कलर तस्वीरों में अलग-अलग रंग सूरज की गर्म प्लाज्मा गैसों के तापमान को दिखाते हैं। लाल रंग लगभग 60 हजार डिग्री सेल्सियस को दिखाता है, जबकि नीला और हरा रंग बहुत गर्म क्षेत्र यानी लगभग दस लाख डिग्री सेल्सियस से ज्यादा को दिखाता है।

साल 1801 में जर्मन वैज्ञानिक जोहान रिटर ने यूवी लाइट की खोज की थी। रिटर ने देखा कि फोटोग्राफिक पेपर नीली रोशनी में जल्दी काला हो जाता है। उन्होंने बैंगनी रंग से आगे की अदृश्य रोशनी में पेपर रखा और वह तेजी से काला हो गया। इससे साबित हुआ कि बैंगनी से परे भी ऊर्जा मौजूद है, जिसे बाद में अल्ट्रावॉयलेट कहा गया। पृथ्वी का वायुमंडल ज्यादातर उच्च-ऊर्जा वाली यूवी किरणों को रोक लेता है। इसलिए वैज्ञानिक सूरज और अन्य तारों-गैलेक्सी से आने वाली यूवी रोशनी का अध्ययन करने के लिए उपग्रहों का इस्तेमाल करते हैं।

नए बने तारे ज्यादातर यूवी लाइट में चमकते हैं। नासा के गैलेक्स मिशन ने एम81 गैलेक्सी की यूवी इमेज ली, जिसमें नए तारों के बनने वाले क्षेत्र साफ दिखते हैं। नासा के अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप ने एस्ट्रो-2 मिशन के दौरान तीन गैलेक्सी की तस्वीरें लीं। यूवी लाइट में गैलेक्सी में नए, भारी और गर्म तारे चमकते दिखते हैं, जबकि दिखाई देने वाली रोशनी में पुराने, ठंडे तारे ज्यादा नजर आते हैं। इससे वैज्ञानिक गैलेक्सी के विकास और तारों के जन्म-मृत्यु के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं।

Exit mobile version