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गेहूं-चावल का स्टॉक भरपूर, कमजोर तबकों को उपलब्ध कराया जा रहा अनाज: भारत सरकार

Wheat and rice stocks are abundant, grains are being made available to vulnerable sections: Government of India

6 अप्रैल । पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि भारत में अन्न की कमी नहीं है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार देश में अन्न का स्टॉक पर्याप्त है, गेहूं-चावल 600 लाख मिट्रिक टन से भी ज्यादा है।

सोमवार को पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने केंद्र की तैयारियों और आगामी योजना पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया, “वर्तमान भंडार लगभग 222 एलएमटी (लाख मिट्रिक टन) गेहूं और 380 एलएमटी चावल का है, कुल मिलाकर लगभग 602 एलएमटी, जो निर्धारित बफर मानकों से लगभग तीन गुना है। इस तरह न सिर्फ पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के लिए बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति को लेकर हमारी तैयारी पूरी है।”

मंत्रालय की ओर से दावा किया गया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कमजोर वर्गों को सहायता जारी है, जबकि ओपन मार्केट सेल्स स्कीम के माध्यम से बाजार में आपूर्ति कर कीमतों को स्थिर रखा जा रहा है। कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और राज्यों को अतिरिक्त वितरण के लिए सब्सिडी वाला चावल उपलब्ध कराया जा रहा है।

संयुक्त सचिव ने कहा, “राज्य एजेंसियों के माध्यम से एमएसपी पर गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है, और इसकी तैयारियों की नियमित समीक्षा की जा रही है। सुचारु खरीद और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए विविध स्रोतों और आकस्मिक उपायों के माध्यम से पर्याप्त पैकेजिंग सामग्री सुनिश्चित की जा रही है।”

सी शिखा के अनुसार, “प्रमुख साझेदारों इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात जारी है। सरसों का उत्पादन बेहतर है इस वजह से घरेलू आपूर्ति मजबूत हुई है। कुल आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। सरकार इस पर कड़ी नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेगी।”

वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिर दोहराया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पर्याप्त है। राज्य सरकारें भी नियमित समीक्षा कर रही हैं ताकि सुचारू वितरण सुनिश्चित हो और कालाबाजारी या जमाखोरी की किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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