N1Live Entertainment जब 18 साल की नरगिस ने किया एक्टिंग डेब्यू तो नाम था ‘रोड़ा’, ऐसे बनीं सिनेमा जगत की ‘शम्मी आंटी’
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जब 18 साल की नरगिस ने किया एक्टिंग डेब्यू तो नाम था ‘रोड़ा’, ऐसे बनीं सिनेमा जगत की ‘शम्मी आंटी’

When 18-year-old Nargis made her acting debut, her name was 'Roda', and this is how she became the 'Shammi Aunty' of the cinema world.

25 अप्रैल । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने मुख्य भूमिका में कम, लेकिन सहायक किरदारों के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उन्हीं में से एक थीं नरगिस रबादी, जिन्हें पूरी दुनिया ‘शम्मी आंटी’ के नाम से जानती है। कम ही लोग जानते हैं कि उनके नाम के साथ भी एक किस्सा जुड़ा हुआ है। 24 अप्रैल को उनकी जयंती के मौके पर जानते हैं उनके नाम से जुड़ी कहानी।

जब 18 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, तब उनका नाम ‘नरगिस’ था, लेकिन बाद में उन्हें अपना नाम बदलना पड़ा। यही बदलाव आगे चलकर उनकी पहचान बन गया और वह ‘शम्मी आंटी’ के नाम से मशहूर हो गईं।

नरगिस रबादी का जन्म 24 अप्रैल 1929 को मुंबई में एक पारसी परिवार में हुआ था। मात्र तीन साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई, जो पारसी समुदाय की धार्मिक सभाओं में खाना बनाकर गुजारा करती थीं। उनकी बड़ी बहन मणि रबादी फैशन डिजाइनर थीं और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हुई थीं।

इन परिस्थितियों के बीच माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद नरगिस ने एक कंपनी में सेक्रेटरी के रूप में नौकरी शुरू की। मात्र 18 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म जगत में कदम रखा। साल 1949 में उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘उस्ताद पेड्रो’ मिली। फिल्म के निर्माता और अभिनेता शेख मुख्तार दूसरी हीरोइन की तलाश में थे। नरगिस से मुलाकात हुई तो वे उनकी प्रतिभा से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने उन्हें फिल्म में भूमिका दे दी, लेकिन समस्या नाम की आ गई। उस समय अभिनेत्री नरगिस दत्त पहले से ही काफी मशहूर थीं। नाम में टकराव से बचने के लिए शेख मुख्तार ने नरगिस रबादी को नाम बदलने को कहा। इसी दौरान उनका नाम ‘शम्मी’ पड़ा। शुरू में तो नाम रखने में काफी परेशानी हुई, लेकिन बाद में ‘शम्मी’ ही उनकी पहचान बन गई।

‘उस्ताद पेड्रो’ के बाद उन्हें ‘मल्हार’ फिल्म में मुख्य भूमिका मिली, जो गानों के कारण सुपरहिट रही। धीरे-धीरे शम्मी की दिलीप कुमार, नरगिस दत्त जैसी बड़ी हस्तियों के साथ गहरी दोस्ती हो गई। नरगिस दत्त उनकी सबसे अच्छी सहेली बन गईं। 30 साल की उम्र में शम्मी ने फिल्म निर्माता सुल्तान अहमद से शादी कर ली, लेकिन ये रिश्ता ज्यादा नहीं चल सका और सात साल बाद दोनों अलग हो गए। उनकी कोई संतान नहीं थी।

शुरुआत में लीड रोल करने वाली शम्मी बाद में सहायक भूमिकाओं में ज्यादा चमकीं। ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, ‘हाफ टिकट’, ‘द ट्रेन’, ‘कुदरत’, ‘हम साथ-साथ हैं’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार दर्शकों को हमेशा याद रहे। 90 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में उन्होंने ‘कुली नंबर 1’, ‘हम’, ‘गुरुदेव’, ‘गोपी किशन’ जैसी फिल्मों में दादी के रोल में दर्शकों का दिल जीता। उन्होंने कुल 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

फिल्मों के अलावा टीवी पर भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी। ‘देख भाई देख’, ‘जबान संभाल के’, ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘कभी ये कभी वो’ और ‘फिल्मी चक्कर’ जैसे सीरियलों में उनकी कॉमेडी टाइमिंग की खूब तारीफ हुई। अपनी प्यारी मुस्कान, मासूम चेहरा और सहज अभिनय के कारण वे घर-घर में ‘शम्मी आंटी’ बन गईं। साल 2013 में आई फिल्म ‘शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी’ में उन्होंने बोमन ईरानी के साथ काम किया।

6 मार्च 2018 को 88 वर्ष की आयु में शम्मी आंटी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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