हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 2026-27 में राज्य में प्रत्यक्ष बीज बोने की तकनीक (डीएसआर) के तहत 5 लाख एकड़ भूमि को कवर करने का लक्ष्य रखा है। यह योजना राज्य भर के 22 जिलों में लागू की जाएगी और विभाग ने जिला-विशिष्ट लक्ष्य जारी कर दिए हैं।
डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) क्या है?
डीएसआर (DSR) में धान की रोपाई की पारंपरिक विधि के बजाय सीधे बीज बोए जाते हैं और इसमें कम पानी और श्रम की आवश्यकता होती है। घटते जलस्तर को देखते हुए, सरकार और कृषि विभाग किसानों को पारंपरिक विधि के बजाय डीएसआर तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ 25 मई से 15 जून तक की अवधि को डीएसआर बुवाई के लिए आदर्श मानते हैं, जिससे अधिकतम उपज सुनिश्चित होती है।
सरकार डीएसआर तकनीक को बढ़ावा क्यों दे रही है?
भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए, धान की रोपाई की पारंपरिक विधि की तुलना में डीएसआर को बेहतर माना जाता है। धान की रोपाई की पारंपरिक विधि में बहुत अधिक श्रम और जल की आवश्यकता होती है, जबकि डीएसआर में पारंपरिक विधि की तुलना में उतने श्रम और जल की आवश्यकता नहीं होती है और इससे जल की खपत और उत्पादन लागत में कमी आती है।
विभाग का लक्ष्य क्या है?
कृषि विभाग ने खरीफ 2026 सीजन के लिए अपने प्रत्यक्ष धान बुवाई (डीएसआर) कार्यक्रम का काफी विस्तार किया है, जिससे लक्षित क्षेत्र पिछले वर्ष के 4 लाख एकड़ से बढ़कर इस वर्ष 5 लाख एकड़ हो गया है। यह योजना, जो पहले केवल 12 धान उत्पादक जिलों तक सीमित थी, अब फसल विविधीकरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2026-27 के लिए राज्य के 22 जिलों को कवर करेगी। किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार डीएसआर का विकल्प चुनने वाले किसानों को प्रति एकड़ 4,500 रुपये का प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।
किन जिलों को सबसे अधिक लक्ष्य प्राप्त हुए हैं?
इस योजना के अंतर्गत आने वाले 22 जिलों में से सिरसा को सबसे अधिक 1.62 लाख एकड़ भूमि का लक्ष्य दिया गया है, इसके बाद फतेहाबाद (75,000 एकड़), यमुनानगर (35,000 एकड़), करनाल, पानीपत और कुरुक्षेत्र (प्रत्येक 30,000 एकड़), अंबाला (25,000 एकड़) और सोनीपत (20,000 एकड़) का स्थान है। जिंद और कैथल को 15,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है, जबकि झज्जर, पलवल और रोहतक को 10,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है। हिसार को 6,500 एकड़, भिवानी और मेवात को 5,000 एकड़, हांसी को 4,500 एकड़, चरखी दादरी को 3,000 एकड़, गुरुग्राम और पंचकुला को 2,500 एकड़, फरीदाबाद और रेवाड़ी को 2,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है। महेंद्रगढ़ एकमात्र ऐसा जिला है जिसे इस योजना से बाहर रखा गया है।
राज्य में लक्ष्य और कवरेज क्यों बढ़ाए जा रहे थे?
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इस तकनीक के प्रति किसानों की प्रतिक्रिया में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। अंबाला के कृषि उप निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि सरकार भूजल संरक्षण के लिए किसानों को डीएसआर (जमीन-आधारित सिंचाई प्रणाली) अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है और यह तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पिछले वर्षों में डीएसआर अपनाने वाले किसानों ने इस मौसम में भी इसी विधि से धान की बुवाई शुरू कर दी है।


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