July 17, 2026
National

‘जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता नहीं देंगे’, संजय निरुपम ने सोज के बयान पर कांग्रेस से मांगा जवाब

‘Will not grant special autonomy to Jammu & Kashmir’: Sanjay Nirupam seeks response from Congress over Soz’s statement.

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 की बहाली की मांग, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप, भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए विवादित बयान और कमीडियन कुणाल कामरा की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को किसी भी प्रकार की विशेष आंतरिक स्वायत्तता देने का सवाल ही नहीं उठता।

कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज द्वारा जम्मू-कश्मीर में आंतरिक स्वायत्तता और आर्टिकल 370 की बहाली की मांग पर संजय निरुपम ने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक बयान है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह सैफुद्दीन सोज के इस बयान से सहमत है। जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने से परहेज किया और अलगाववादी सोच को बढ़ावा मिला। अब आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर धीरे-धीरे देश की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। ऐसे समय में आंतरिक स्वायत्तता की मांग करना उचित नहीं है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और अन्य राज्यों की तरह ही उसका भी देश में समान स्थान है, इसलिए वहां आर्टिकल 370 को दोबारा लागू करने या किसी विशेष आंतरिक स्वायत्तता की बात स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान पर कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हिंदुओं के आराध्य हैं और उनके बारे में इस प्रकार के दावे पूरी तरह अनुचित हैं। भगवान श्रीकृष्ण का अस्तित्व उस समय का है, जब इस्लाम का उदय भी नहीं हुआ था। उन्होंने ऐसे बयानों को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया और कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व के बारे में भ्रामक या विवादित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज के लिए सेंसर बोर्ड प्रमाणन अनिवार्य किए जाने की संभावित चर्चा पर संजय निरुपम ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में सिनेमाघरों में दिखाई जाने वाली फिल्मों, नाटकों और यहां तक कि विज्ञापन फिल्मों के लिए भी सेंसर बोर्ड का प्रमाणपत्र आवश्यक होता है, लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म अभी तक इस व्यवस्था के दायरे से बाहर हैं। हाल में ‘सतलुज’ फिल्म को लेकर जो विवाद सामने आया, उससे यह सीख मिलती है कि ओटीटी पर आने वाली फिल्मों और कार्यक्रमों की भी समीक्षा होनी चाहिए। इससे ऐसी सामग्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, जो देशहित के खिलाफ हो, भ्रामक जानकारी फैलाती हो या अश्लीलता को बढ़ावा देती हो।

कमीडियन कुणाल कामरा को लेकर संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुणाल कामरा कॉमेडी के नाम पर राजनीतिक प्रचार करते हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ विधानसभा की विशेषाधिकार समिति कार्रवाई कर रही है। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया चल रही है और समिति के समक्ष उन्हें पेश होना पड़ रहा है। यदि भविष्य में भी इस प्रकार की टिप्पणियां जारी रहीं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

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