16वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल प्रदेश को दी जाने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करने की सिफारिश के बाद वित्तीय संकट का सामना कर रहे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने सभी विभागों को संसाधन जुटाने और फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया है। मंत्रिमंडल ने आरडीजी की वापसी के प्रभावों की समीक्षा की और व्यापक कटौती के बजाय एक सुनियोजित प्रतिक्रिया का संकेत दिया।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि वित्तीय संकट के बावजूद वृद्धावस्था पेंशन योजना (ओपीएस), सामाजिक कल्याण योजनाओं और पेंशन योजनाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि वित्त सचिव ने ओपीएस से एनपीएस में परिवर्तन, महंगाई भत्ता (डीए) और बकाया राशि रोकने तथा सब्सिडी में कटौती जैसे कड़े कदम सुझाए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल का होगा।
उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में सरकार ने अपने प्रयासों से 3,500 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जबकि पिछली भाजपा सरकार की तुलना में आरडीजी राजस्व में भारी गिरावट आई है। राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के तहत कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी (विनियमन) नियम, 2026 का मसौदा तैयार करने के लिए एक उप-समिति को मंजूरी दी।


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