नलवाड़ी महोत्सव में गुरुवार को बिलासपुर में नाट्य उत्सव की दूसरी सांस्कृतिक संध्या के दौरान ‘ज़हर’ और ‘एक लड़की पांच दीवाने’ सहित नाटकों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
नाट्य उत्सव – थिएटर महोत्सव का समापन शिमला के नाट्यनुकृति नाट्य समूह द्वारा ‘ज़हर’ के मंचन के साथ हुआ। संजय सूद द्वारा निर्देशित इस नाटक ने मानव मन में विद्यमान “विष” का गहन मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
इस नाटक में घृणा, अहंकार और जटिल मानवीय संबंधों जैसे विषयों को दर्शाया गया है, जिसमें एक बूढ़े रसायनज्ञ और एक धनी ग्राहक के बीच गहन संवाद के माध्यम से कहानियों को प्रस्तुत किया गया है। ‘ज़हर’ ने यह संदेश दिया कि असली ज़हर रसायनों में नहीं, बल्कि क्रोध, आक्रोश और प्रतिशोध जैसी मानवीय भावनाओं में निहित है। इसने नैतिक सीमाओं और अपराधबोध की धारणा पर सवाल उठाया और दर्शकों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि क्या कोई भी
पूरी तरह निर्दोष।
दूसरा नाटक, ‘एक लड़की पांच दीवाने’, बिलासपुर के उड़ान थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत व्यंग्यात्मक हास्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हरिशंकर परसाई के प्रशंसित व्यंग्य पर आधारित और अभिषेक डोगरा द्वारा निर्देशित इस नाटक ने महिलाओं के प्रति दकियानूसी सोच की आलोचना करते हुए हास्य और विडंबना के माध्यम से पितृसत्तात्मक पाखंड को उजागर किया।
बिलासपुर के उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि सामाजिक बुराइयों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियाँ दर्शकों पर गहरा प्रभाव डालती हैं और सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहायक होती हैं। उन्होंने नलवारी महोत्सव के दौरान नाट्य उत्सव के आयोजन के लिए कला, भाषा और संस्कृति विभाग की सराहना भी की।


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