पंजाब सरकार के उस फैसले के खिलाफ 1,000 से अधिक सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के गैर-शिक्षण कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें तीन साल की परिवीक्षा अवधि के लिए मूल वेतन के भुगतान के अधीन उनकी सेवाओं को नियमित करने का निर्णय लिया गया है। इनमें से अधिकांश कर्मचारियों ने 20 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है और संविदा कर्मचारियों के रूप में 40,000 रुपये का वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
एसएसए के गैर-शिक्षण कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजिंदर सिंह ने कहा, “अगले तीन से पांच वर्षों में कम से कम 100 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। तीन साल बाद जब हमें पूरा वेतन मिलना शुरू होगा, तब तक हममें से कई लोग सेवानिवृत्त हो चुके होंगे।” एसएसए के गैर-शिक्षण कर्मचारियों में लेखाकार, डेटा एंट्री ऑपरेटर, एमआईएस समन्वयक और सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) शामिल हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नियमितीकरण के आदेश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों पर जारी किए गए थे। एसोसिएशन के नेताओं ने राज्य सरकार पर 25 करोड़ रुपये बचाने के लिए कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। सिंह ने कहा, “हमारे लिए मात्र 16,000 रुपये में अपना खर्च चलाना संभव नहीं था।”


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