हरियाणा के मुख्य सचिव डॉ. विवेक जोशी ने आज यहां राज्य सहकारी विकास समिति (एससीडीसी) की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की।
710 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के कम्प्यूटरीकरण पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल पीएसीएस की कार्यकुशलता में सुधार आएगा, बल्कि भ्रष्ट आचरण से निपटने में भी मदद मिलेगी। मुख्य सचिव ने डिजिटल ढांचे में निर्बाध बदलाव सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का भी आह्वान किया।
बैठक में बताया गया कि पीएसीएस/पीसीसीएस (प्राथमिक सहकारी ऋण समितियां) ने हरियाणा की सभी ग्राम पंचायतों को कवर कर लिया है।
आगे बढ़ते हुए, राज्य के प्रत्येक ग्राम पंचायत में डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों के साथ-साथ बहुउद्देशीय पैक्स के गठन के लिए सभी जिलों में एक संयुक्त कार्य समिति का गठन किया गया है।
बैठक में बताया गया कि हरियाणा में सभी पैक्स/पीसीसीएस द्वारा नए आदर्श उपनियमों को अपनाया गया है ताकि उनकी व्यवहार्यता बढ़ाई जा सके और उनकी गतिविधियों में विविधता लाई जा सके, जिससे वे ग्राम स्तर पर जीवंत आर्थिक इकाई बन सकें।
केंद्र सरकार के एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य की पैक्स समितियां नए गोदामों के निर्माण पर भी काम कर रही हैं। पैक्स समितियां लोगों को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की सेवाएं भी उपलब्ध कराएंगी।
राज्य में कुल 433 PACS को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में शामिल किया गया है, जबकि 202 PACS द्वारा CSC सेवाएं पहले ही शुरू कर दी गई हैं। बास, मतलोदा, नारनौद और हथीरा नामक चार PACS ने जन औषधि केंद्रों में दवाओं की बिक्री शुरू कर दी है। इसके अलावा, 742 PACS ने प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में काम करना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम 2002 के तहत सहकारी क्षेत्र से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में नये राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड की स्थापना की गई है।
इस सोसायटी के माध्यम से किसानों के उत्पादों के निर्यात में सुविधा होगी तथा किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा। 420 समितियों को राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड की सदस्यता दी गई है।
इसके अलावा, 347 समितियों को राष्ट्रीय सहकारी जैविक लिमिटेड का सदस्य बनाया गया है, जिसे बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत एक छत्र संगठन के रूप में स्थापित किया गया है जो प्रमाणित और प्रामाणिक जैविक उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के लिए काम करेगा।
इसके अतिरिक्त, 499 समितियों को एक नई भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की सदस्यता प्रदान की गई है, जिसे एक ही ब्रांड नाम के अंतर्गत उन्नत बीजों की खेती, उत्पादन और वितरण के लिए एक छत्र संगठन के रूप में स्थापित किया गया है।
मुख्य सचिव ने सहकारिता विभाग को सहकारी समूह आवास समितियों के सदस्यों के समक्ष आने वाली समस्याओं की पहचान करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने को भी कहा।
समिति उनकी शिकायतों के समाधान के लिए अपनी सिफारिशें देगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त एवं योजना श्री अनुराग रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सहकारिता श्री अंकुर गुप्ता, आयुक्त एवं सचिव, विकास एवं पंचायत श्री अमित कुमार अग्रवाल, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां श्री राजेश जोगपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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