सेना के पूर्व अधिकारी कर्नल (डॉ.) अरुण शर्मा ने गुरुवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित ’21वीं सदी में संकर युद्ध और ग्रे ज़ोन संघर्ष: ईरान-इजराइल युद्ध से भारत के लिए सामरिक सबक’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सामरिक परिदृश्य का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करते हुए संकर युद्ध की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने समझाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल टकराव जैसे समकालीन संघर्ष, जो शुरू में पारंपरिक युद्ध थे, किस प्रकार तेजी से संकर युद्ध रूपों में परिवर्तित हो रहे हैं। वे वर्तमान में शिमला के अन्नादले स्थित सेना विरासत संग्रहालय का नेतृत्व कर रहे हैं।
कर्नल शर्मा ने विस्तार से बताया कि यह परिवर्तन किस प्रकार वैश्विक संघर्षों की प्रकृति को नया आकार दे रहा है और दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक परिदृश्यों को प्रभावित कर रहा है।
कर्नल शर्मा ने पारंपरिक सैन्य साधनों से प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों की ओर युद्ध के बदलाव पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युद्ध तेजी से “गोलियों से एल्गोरिदम की ओर” बढ़ रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक योजना में साइबर तैयारियों के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा की।
प्रोफेसर हरीश ठाकुर ने विश्व व्यवस्था की बदलती प्रकृति और समकालीन रणनीतिक वातावरण में भारत पर इसके प्रभावों के बारे में अपने विचार साझा किए।
इस सत्र में रक्षा एवं सामरिक अध्ययन, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन विभागों के 85 छात्र शामिल हुए। सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान छात्रों ने वक्ता के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की।

