August 20, 2026
Himachal

नूरपुर के जवाली कॉलेज में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

A workshop on cultural heritage conservation was organized at Jawali College in Nurpur.

हिमालयी सांस्कृतिक विरासत संरक्षण एवं विकास अभियान के अंतर्गत, मंगलवार को कांगड़ा जिले के जवाली स्थित सरकारी महाविद्यालय में एक सांस्कृतिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय युवा विकास केंद्र (एनवाईडीसी) नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा संचालित की गई।

उद्घाटन सत्र में बोलते हुए शिक्षाविद दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत परंपराओं, रीति-रिवाजों और मान्यताओं का अनूठा संगम है। उन्होंने पारंपरिक लोक संस्कृति को मानवीय भावनाओं की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और पूर्वजों से विरासत में मिली एक अनमोल धरोहर बताया। शर्मा ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं ने देश को वैश्विक मंच पर एक विशिष्ट पहचान दी है। उन्होंने आगे कहा, “विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की पहचान है।”

कार्यशाला के दौरान प्रख्यात लोक कलाकार बरयाम सिंह ने प्रतिभागियों को हिमालयी लोकगीतों की पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दिया। एनवाईडीसी के निदेशक संजीव जाखमी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह राष्ट्र की पहचान, आत्मा और सभ्यता की नींव है। उन्होंने युवा पीढ़ी को देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और प्रचार के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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