N1Live Punjab जो सवाल उठाए, सड़ी-गली व्यवस्था बदलना चाहे, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखे, पीएम के हिसाब से वह दिमागी नक्सल- केजरीवाल
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जो सवाल उठाए, सड़ी-गली व्यवस्था बदलना चाहे, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखे, पीएम के हिसाब से वह दिमागी नक्सल- केजरीवाल

According to the PM, anyone who raises questions, seeks to change a rotten system, or dreams of a corruption-free India is an 'Urban Naxal'—Kejriwal.

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 17 अगस्त | आम आदमी पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की ओर से देश में सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को ‘दिमागी नक्सल’ कहने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल खुद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि हां, मैं दिमागी नक्सल हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस पर गर्व है। इस देश में जो सवाल उठाए, सड़ी-गली व्यवस्था बदला चाहे और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखे, प्रधानमंत्री के हिसाब से वह दिमागी नक्सल है। आज अगर भगत सिंह और बाबा साहब अंबेडकर जिंदा होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी नहीं छोड़ते और उनको भी दिमागी नक्सल बोलते। उन्होंने कहा कि अगर देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा या बोलेगा, तो मैं अपनी पूरी ताकत के साथ उसका मुकाबला करेगा।

सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सल वह है, जो इस देश में प्रश्न उठाने की हिम्मत करता है। जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, जो अच्छे सरकारी स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी, सीवर, ड्रेनेज और अच्छी व्यवस्था चाहता है, जो भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है, वह प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सल है। जो प्रधानमंत्री और भाजपा से डरता नहीं है और एक विकसित भारत का सपना देखता है, वह प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सल है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज अगर भगत सिंह जिंदा होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी दिमागी नक्सल बोलते। आज अगर बाबा साहब अंबेडकर जिंदा होते, जिन्होंने सबकी बराबरी के लिए लड़ाई लड़ी थी, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी नहीं छोड़ते और उन्हें भी दिमागी नक्सल बोलते। मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि मैं अरविंद केजरीवाल उनके हिसाब से दिमागी नक्सल हूं क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस बात का गर्व है। अगर देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा या बोलेगा, तो केजरीवाल अपनी पूरी ताकत के साथ उसका मुकाबला करेगा।

उधर, “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी इस वक्त नौजवानों और जेन-जी के आंदोलन से बहुत परेशान हैं और अब जेन-अल्फा भी सड़कों पर आ गए हैं। वो कह रहे हैं कि पेपर लीक बंद करो, हमारे स्कूल ठीक करो और हमारी जिंदगी में सुधार लाओ। प्रधानमंत्री जी इतने परेशान हैं कि कभी रात में 12 बजे उठकर रील बनाने लगते हैं और कभी इन्हीं नौजवानों को दिमागी नक्सल कहते हैं।

संजय सिंह ने पूछा कि प्रधानमंत्री जी आप दिमागी नक्सल किसको कहते हैं? वो नौजवान जो कह रहे हैं कि देश में पेपर लीक बंद करो और हमें रोजगार दो? वो छोटे-छोटे बच्चे जो सड़कों पर उतर कर कह रहे हैं कि हमारे स्कूल की छत टूट जा रही है, बच्चों के लिए बैठने का कमरा नहीं है, मिड-डे मील में नमक-रोटी खाने को मिलती है और हमारे खाने में कीड़े मिलते हैं, इसे ठीक कर दिया जाए। क्या प्रधानमंत्री जी उनको दिमागी नक्सल कहकर संबोधित कर रहे हैं? प्रधानमंत्री जी से यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि जनता, नौजवान, छोटे-छोटे बच्चे, किसान और इस देश की माताएं-बहनें अपने लिए आवाज उठाना कैसे शुरू कर दिए।

संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नफरतों से भरे हुए व्यक्ति हैं। वह इन चीजों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि उनके खिलाफ कैसे छोटे-छोटे बच्चे और नौजवान सड़कों पर निकल रहे हैं, इसलिए उनको उन्होंने दिमागी नक्सल कहकर संबोधित किया। मैं नौजवानों से और खासतौर से उन नौजवानों से कहना चाहता हूं जो आज स्कूल ठीक करो अभियान चला रहे हैं कि सीजेपी के लोग डरना नहीं, झुकना नहीं, लड़ते रहना है और आगे बढ़ते रहना है।

संजय सिंह ने कहा कि असली दिमागी नक्सल भाजपा के वो लोग हैं जिन्होंने अब्दुल के पिता की हत्या की। दिमागी नक्सल वो लोग हैं जिन्होंने राजस्थान जाकर छोटे-छोटे बच्चों व सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। दिमागी नक्सल वो लोग हैं जो स्कूल की बात कहने पर मुकदमा लिखवाते हैं। इसलिए असल में दिमागी नक्सल झगड़ा कराने वाली भारतीय झगड़ा पार्टी है। दिमागी नक्सल इस देश का नौजवान नहीं है, वह तो अपने हक की आवाज उठा रहा है और हमेशा उठाता रहेगा।

संजय सिंह ने एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के नौजवानों को ‘दिमागी नक्सल’ कहा। क्या पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली जेन-जी ‘दिमागी नक्सल’ है? क्या अपने स्कूलों को ठीक करने की मांग करने वाले छोटे-छोटे बच्चे ‘दिमागी नक्सल’ हैं? या फिर लड़ाई कराने वाली ‘भारतीय झगड़ा पार्टी’ दिमागी नक्सल है?

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