अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज्ज ने पंजाब पुलिस के उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर संगरूर जिले के शेरोन गांव के सिख युवक मोहनजीत सिंह के ‘काकार’ (सिख धर्म की वस्तुएं) को प्रताड़ित किया और उनका अपमान किया। मोहनजीत सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के गांव दौरे के दौरान नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी और विरोध प्रदर्शन किया था।
पंजाब में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की गंभीर समस्या पर प्रकाश डालते हुए जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि हर गांव में 10 से 15 युवक नशे की चपेट में आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में “चिट्टा” (हेरोइन/सिंथेटिक ड्रग्स) की बिक्री पूरी तरह से बंद होनी चाहिए, क्योंकि यह सरकार की मिलीभगत से बेची जा रही है।
जत्थेदार गर्गज ने कहा कि सिख युवक मोहनजीत सिंह ने अपने पड़ोसी के घर की छत से शांतिपूर्वक “गुरु डोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाया था, जो उसका “लोकतांत्रिक अधिकार” था। उन्होंने कहा कि काला झंडा दिखाना कोई अपराध नहीं है, और आरोप लगाया कि स्थानीय डीएसपी हरविंदर सिंह खैरा ने उसी झंडे को युवक के गले में डालकर उसे घसीटकर ले गए और फिर उसे गंभीर अवैध यातनाएं दीं।
जत्थेदार ने कहा कि उन्होंने संगरूर जिले के पुलिस अधीक्षक से भी बात की है और उनसे अनुरोध किया है कि सिख युवक पर कथित अत्याचार और उसके ‘ककार’ के अपमान के लिए जिम्मेदार डीएसपी और एसएचओ को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
युवक कुलदीप सिंह गरगज के खुलासे के अनुसार, पुलिस ने कथित तौर पर उसकी कमर पर ब्रश से वार किया और घावों पर नमक छिड़का, उसके सिर पर जूतों से मारा, उसकी दाढ़ी और बालों का अपमान किया और उसका कच्छरा (शरीर में पहनने के लिए निर्धारित शॉर्ट्स) उतारकर फाड़ दिया। उसने कहा कि अगर पुलिस संबंधित अधिकारियों को बर्खास्त नहीं करती और उनके खिलाफ “धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और युवक को प्रताड़ित करने” के लिए मामला दर्ज नहीं करती, तो अकाल तक़्त साहिब पीड़ित के साथ खड़ा रहेगा और इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। उसने यह भी कहा कि वह जल्द ही युवक से मिलने जाएगा।
जत्थेदार ने कहा कि अगर पंजाब सरकार खुद सिखों के साथ ऐसा बर्ताव कर रही है, तो दुनिया के अन्य हिस्सों में सत्ताधारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सिख युवाओं पर अत्याचार और यातनाएं देकर जकारिया खान के नक्शेकदम पर चल रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या पंजाब पुलिस खुद ही कानून बन गई है और सरकार ने उसे मनमानी करने की असीमित शक्तियां दे दी हैं? उन्होंने कहा कि सिख युवा नशे की समस्या का विरोध कर रहे हैं और सरकार को पंजाब में नशे के बेतहाशा प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
जत्थेदार ने कहा कि नशे की लत से ग्रस्त युवाओं को समाज से बहिष्कृत करने के बजाय मदद और समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से आनंदपुर साहिब लौटने, अपने बाल (बिना कटे बाल) रखने, नशा छोड़ने और सिख जीवन शैली तथा गुरु की शिक्षाओं से पुनः जुड़ने की अपील की।


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