February 27, 2026
Entertainment

‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ को सेंसर सर्टिफिकेट, फिर ‘चरक’ को रिव्यू कमेटी क्यों: सुदीप्तो सेन

‘Animal’ and ‘Dhurandhar’ got censor certificate, then why review committee for ‘Charak’: Sudipto Sen

27 फरवरी । निर्देशक सुदीप्तो सेन ने अपनी आगामी फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सेंसर बोर्ड पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब ‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों को आसानी से सर्टिफिकेट मिल जाता है, तो फिर ‘चरक’ जैसी फिल्मों को रिव्यू कमेटी के लंबे और कठिन दौर से क्यों गुजरना पड़ता है।

सुदीप्तो का आरोप है कि यह रवैया केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और सरकारी प्रक्रियाओं में दोहरे मानदंड को दर्शाता है। सुदीप्तो सेन ने कहा, ”हम इस मुद्दे पर पहली बार नहीं बोल रहे हैं। साल 2013-2014 से अलग-अलग मंचों और फोरम पर इस तरह के भेदभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। एक तरफ हिंसा, आक्रामकता और विवादित दृश्यों वाली फिल्मों को बिना आपत्ति के मंजूरी मिल जाती है, जबकि दूसरी तरफ सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सवाल उठाने वाली फिल्मों को बार-बार जांच और समीक्षा की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।”

सुदीप्तो ने इसे सिस्टम का डबल स्टैंडर्ड करार दिया। उन्होंने कहा कि हम लोग ज्यादा से ज्यादा अपनी आवाज उठा सकते हैं और सवाल कर सकते हैं। हमें संघर्ष ही करना पड़ता है। ‘द केरल स्टोरी’ के समय भी हमें इसी तरह के संघर्ष से गुजरना पड़ा था। तब भी फिल्म को लेकर विवाद, विरोध और जांच का लंबा दौर चला था।

दरअसल, ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ एक लोककथा-आधारित थ्रिलर फिल्म है, जो भारत के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और कठोर धार्मिक अनुष्ठानों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन शिलादित्य मौलिक ने किया है, जबकि इसे सुदीप्तो सेन ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में दिखाए गए कुछ दृश्य और विषय सेंसर बोर्ड को आपत्तिजनक लगे, जिसके चलते इसे सीधे सर्टिफिकेट देने के बजाय रिव्यू कमेटी के पास भेज दिया गया।

सुदीप्तो सेन का कहना है कि उनकी फिल्म किसी धर्म या आस्था का अपमान नहीं करती, बल्कि आस्था के नाम पर होने वाली गलत और गैर-कानूनी गतिविधियों पर सवाल उठाती है। अगर समाज में किसी भी तरह की हिंसक या अमानवीय प्रथा मौजूद है, तो सिनेमा का काम उसे सामने लाना होना चाहिए।

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