कांग्रेस विधायक जुबैर अनाम ने सोमवार को असम सरकार के राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करने के कदम की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून के कई प्रावधानों में समानता का अभाव है।
विधानसभा में बिल पेश किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस विधायक ने आईएएनएस को बताया कि प्रस्तावित कानून के कई प्रावधान असमान लग रहे हैं और विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उन पर विस्तार से चर्चा की जरूरत होगी। यह बिल अपने आप में समान नहीं है। इसमें कई मुद्दे समान नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष विधानसभा में प्रस्तावित कानून पर चर्चा के दौरान अपनी चिंताएं उठाएगा।
कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी इस बिल की आलोचना करते हुए कहा है कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक प्रथाओं में दखल देने वाले किसी भी कानून का पार्टी विरोध करेगी। असम सरकार ने सोमवार को विधानसभा में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026’ पेश किया।मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से मंत्री अतुल बोरा ने यह कानून सदन में रखा।
सत्ताधारी भाजपा का कहना है कि प्रस्तावित यूसीसी कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करेगा और शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एकरूपता लाएगा। हालांकि, विपक्षी दलों ने प्रस्तावित कानून पर चिंताएं जताई हैं और तर्क दिया है कि इसके कुछ प्रावधान अलग-अलग समुदायों के अधिकारों और रीति-रिवाजों पर असर डाल सकते हैं।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि विधानसभा में इस बिल को पेश करने से इस बात पर रिकॉर्ड पर चर्चा का रास्ता खुलेगा कि यूसीसी क्यों जरूरी है और यह देश के संस्थापकों की सोच के अनुरूप कैसे है।
मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा कि असम विधानसभा में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026 बिल’ पेश होने से इस बात पर रिकॉर्ड पर चर्चा का रास्ता खुल गया है कि यूसीसी असम आज की जरूरत क्यों है और यह हमारे संस्थापकों द्वारा दिखाए गए रास्ते को साकार करने में कैसे मदद करेगा।

