राम मंदिर दान प्रकरण में अयोध्या पुलिस के हाथ आरोपियों के जमीन और बैंक रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अपराध से अर्जित संपत्ति की तेजी से जांच की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग से आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के जमीन रिकॉर्ड मांगे गए थे, जिनमें से अब तक करीब 20 लैंड पार्सल के रिकॉर्ड पुलिस को मिल चुके हैं। इन दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि जांच में यह देखा जा रहा है कि संबंधित संपत्तियां कब खरीदी गईं और आरोपियों का राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ाव कब हुआ। पुलिस के लिए इन दोनों तारीखों का मिलान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि अगर जांच में यह सामने आता है कि आरोपियों ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने के बाद ये संपत्तियां खरीदी हैं और उनके लिए इस्तेमाल धन का स्रोत संदिग्ध पाया जाता है, तो प्रशासन इन्हें ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध से अर्जित संपत्ति) मानकर आगे की कार्रवाई कर सकता है।
इससे पहले शुक्रवार को अयोध्या पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर एक वाहन को ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ मानते हुए जब्त किया था।
वहीं, शुक्रवार को जांच एजेंसियों को पहली ऐसी तस्वीर मिली, जिसमें दो आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के नकदी गिनती केंद्र के अंदर दिखाई दे रहे थे। यह तस्वीर जांच में अहम सबूत मानी जा रही है, क्योंकि इसमें आरोपी उस कमरे के अंदर नजर आए, जहां श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए दान की गिनती की जाती थी और उसे आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार किया जाता था।
मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा भी शामिल हैं। अन्य आरोपियों के नाम टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव हैं।


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