N1Live National 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगे रोक, भारत भी बनाए कानून: सौम्या अंबुमणि
National

15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगे रोक, भारत भी बनाए कानून: सौम्या अंबुमणि

Ban social media use for children under 15; India should also enact a law: Sowmya Anbumani.

पीएमके (पपट्टाली मक्कल काची) की विधायी दल की नेता सौम्या अंबुमणि ने भारत में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत को भी बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।

सौम्या अंबुमणि तिरुवल्लूर जिले के पेरियापालयम के निकट वेल्स एजुकेशनल ग्रुप द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यक्रम में करीब 1,000 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं सौम्या अंबुमणि ने शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए और शुभकामनाएं दीं।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वालों में 97 प्रतिशत स्कूल और कॉलेज के छात्र हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों को कई तरह की परेशानियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। खासकर सार्वजनिक मंचों पर निजी जानकारी साझा करने से वे विभिन्न जोखिमों के संपर्क में आ जाते हैं।

उन्होंने कहा कि छात्र अक्सर अपने माता-पिता की तुलना में शिक्षकों की बात अधिक गंभीरता से सुनते हैं। इसलिए शिक्षकों को चाहिए कि वे कक्षा के दौरान प्रतिदिन छात्रों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें। सौम्या अंबुमणि ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान समय में लड़के 12 साल की उम्र से ही शराब का सेवन शुरू कर रहे हैं, जबकि आठ वर्ष की आयु की लड़कियां भी विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने संबंधी कानून भारत में भी लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पीएमके नेता अंबुमणि रामदास पहले ही इस मुद्दे को संसद में उठा चुके हैं और इस विषय पर तमिलनाडु विधानसभा में भी चर्चा हो चुकी है। सौम्या अंबुमणि ने शिक्षकों से छात्रों को बुरी आदतों और नकारात्मक प्रभावों के प्रति “ना” कहना सिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में नैतिक शिक्षा का महत्व कम हुआ है, जबकि छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास बेहद जरूरी है।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पर्यावरणीय क्षरण के दुष्प्रभावों और प्रकृति के संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

Exit mobile version