N1Live National लद्दाख के संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में अधिकारों और दावों के निपटारे की प्रक्रिया दो महीने में पूरी होगी: एलजी
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लद्दाख के संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में अधिकारों और दावों के निपटारे की प्रक्रिया दो महीने में पूरी होगी: एलजी

Process for settling rights and claims in Ladakh's protected wildlife areas to be completed in two months: LG

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने संरक्षित हेमिस, चांगथांग और काराकोरम वन्यजीव क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों और दावों के निपटारे की प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उपराज्यपाल ने यह फैसला शुक्रवार को हुई 16वीं स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की बैठक के दौरान लिया। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य स्थानीय समुदायों के लंबे समय से चले आ रहे पारंपरिक अधिकारों और बस्तियों को लेकर स्पष्टता सुनिश्चित करना है।

सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वन्यजीव क्षेत्रों की सीमाओं के अंतिम निर्धारण को लेकर पिछली उप-समिति की रिपोर्ट को अलग रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट केवल कागजी या ‘टेबल-टॉप एक्सरसाइज’ पर आधारित थी और इसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि पिछली प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के साथ-साथ इन क्षेत्रों में पीढ़ियों से रह रहे स्थानीय समुदायों की वास्तविक चिंताओं और अधिकारों को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

एलजी ने कहा कि आगे की प्रक्रिया कानून के अनुरूप और स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ पूरी की जानी चाहिए। इसके तहत सभी जिलाधिकारियों (डीसी) और सेटलमेंट अधिकारियों को स्थानीय लोगों से आपत्तियां और सुझाव प्राप्त करने के लिए तत्काल जनसुनवाई फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें यह पूरी प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है।

सक्सेना ने कहा कि इस निर्णायक कदम से लद्दाख के लोगों को उनके पारंपरिक अधिकारों और इन क्षेत्रों में मौजूद उनकी बस्तियों को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता दूर करने में मदद मिलेगी। साथ ही, लद्दाख के विशिष्ट और महत्वपूर्ण वन्यजीवों के संरक्षण को भी मजबूती से सुनिश्चित किया जाएगा।

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