N1Live Entertainment बर्थडे स्पेशल : ढाई साल की उम्र में लड़कों का किरदार निभाने वाली हनी ईरानी का मीना कुमारी से खास रिश्ता
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बर्थडे स्पेशल : ढाई साल की उम्र में लड़कों का किरदार निभाने वाली हनी ईरानी का मीना कुमारी से खास रिश्ता

Birthday Special: Honey Irani, who played the role of a boy at the age of two and a half, has a special relationship with Meena Kumari.

आपने भी सुना होगा, ‘पूत के पांव पालने में नजर आते हैं।’ यह कहावत बच्चों के भविष्य और गुणों का आकलन करती है। इसी कहावत को सार्थक करती हैं हनी ईरानी, जिन्हें आज हम फरहान और जोया अख्तर की मां के रूप में जानते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि 1960 के दशक में एक ऐसा समय भी था, जब वे उस दौर के सबसे बड़े सितारों के बराबर मशहूर थीं और लगभग हर फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम करती थीं।

17 जनवरी को जन्मीं हनी ईरानी ने ढाई साल की उम्र में हिंदी सिनेमा में बतौर बाल कलाकार डेब्यू किया था। वे अकेली नहीं थीं, उनका साथ देने के लिए उनकी बहन डेजी ईरानी भी मौजूद रहती थी। दोनों बहनों के घुंघराले बाल और आंखों को मटकाने का अंदाज सभी का दिल जीतने में कामयाब रहा। आलम ये रहा कि दोनों बहनों या किसी एक को भी फिल्म में कास्ट करने के लिए खास जगह बनाई जाने लगी, स्क्रिप्ट्स में बदलाव तक होने लगा।

बचपन में ही हनी ईरानी का मन मीना कुमारी से जुड़ गया था, क्योंकि वे असल में उनमें मां की छवि देखने लगी थीं। 1959 में आई फिल्म ‘चिराग कहां रोशनी कहां’ में हनी ने मीना कुमारी के साथ काम किया था। फिल्म में घुंघराले बालों की वजह से उन्होंने नन्हें राजू की भूमिका अदा की थी। इस फिल्म के दौरान मीना कुमारी ने हनी और उनकी बहन डेजी को इतना प्यार दिया कि उन्हें सेट पर कभी मां की कमी महसूस नहीं हुई।

मीना कुमारी सेट पर दोनों का ऐसे ध्यान रखती थी जैसे दोनों उन्हीं के बच्चे हों। सेट पर दोनों के बीच का प्रेम देखकर बाकी लोग भी हैरान हो जाते थे। मीना कुमारी और हनी ईरानी की जोड़ी फिल्म ‘चिराग कहां रोशनी कहां’ में हिट रही, और फिर जोड़ी बाद में 1960 में आई ‘संतान’, ‘एक ही रास्ता’, और ‘गोमती के किनारे’ जैसी फिल्मों में साथ दिखी।

मीना कुमारी और हनी का रिश्ता सिर्फ सेट तक सीमित नहीं था। सेट के बाहर असल जिंदगी में भी मीना दोनों को अपने बच्चों के जैसे ही मानती थी। खुद हनी ने इंटरव्यू में कहा था कि मीना कुमारी सेट पर उन्हें अपने बच्चों की तरह चाहती थी। हनी ने मीना कुमारी को सनशाइन वुमेन का टाइटल भी दिया था, जिन्होंने उनकी जिंदगी को रोशनी से जगमगा दिया था।

हनी ईरानी बेहतरीन एक्ट्रेस होने के साथ-साथ अच्छी लेखिका भी रहीं। उन्होंने ‘कहो ना प्यार है’, ‘कोई मिल गया’, ‘लम्हें’, ‘आइना’, ‘डर’ और ‘क्या कहना’ जैसी फिल्मों से एक सफल पटकथा लिखी।

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