April 29, 2026
National

भाजपा ने ‘बंगाल फतह’ के लिए ऐसे की घेराबंदी, ‘सिंडिकेट और घुसपैठियों’ पर सवाल, 4 मई का इंतजार

BJP sets up siege to ‘conquer Bengal’, questions ‘syndicates and infiltrators’, awaits May 4

29 अप्रैल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार एक ऐतिहासिक और बेहद आक्रामक सियासी लड़ाई का गवाह बना है। सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ चुनावी रण में उतरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस चुनाव में अपनी पूरी शीर्ष नेतृत्व की ताकत झोंक दी।

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन तक जिस तरह से भाजपा के दिग्गजों ने पश्चिम बंगाल के चप्पे-चप्पे पर रैलियों और रोड-शो का आयोजन किया, वह इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के लिए यह महज एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि एक वैचारिक और राजनीतिक अस्मिता की लड़ाई थी।

​भाजपा के पूरे चुनावी अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य की सत्तारूढ़ सरकार को ‘सिंडिकेट राज’ और ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे पर घेरना रहा। भाजपा ने पश्चिम बंगाल फतह के लिए अपने सबसे बड़े चेहरों को लगातार चुनावी प्रचार के मैदान में उतारे रखा। जनसभाओं, विजय संकल्प रैली और रोड शो की संख्या यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा ने किस स्तर की ताकत लगाई है।

भाजपा के मुख्य रणनीतिकार और मौजूदा राजनीति के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में मोर्चा संभाले रखा। उन्होंने मार्च के अंत में ‘परिवर्तन यात्रा’ के शुभारंभ से लेकर 27 अप्रैल को प्रचार के अंतिम दिन तक धुआंधार रैलियां और जनसभाएं करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार को घेरा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10, 11, 13, 14, 15, 21, 22, 23, 24, 25, 26 और 27 अप्रैल को लगातार बैक-टू-बैक जनसभाएं, रोड-शो और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टीएमसी सरकार पर सीधा हमला बोला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में ‘विजय संकल्प सभाओं’ के जरिए माहौल को पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में मोड़ने का प्रयास किया। 14 मार्च से लेकर 9, 12 (सिलीगुड़ी), 19, 23, 24, 26 और 27 अप्रैल (बैरकपुर) तक पीएम मोदी ने कई विशाल जनसभाओं को संबोधित किया, जहां उन्होंने सीधे तौर पर जनता से बदलाव की अपील की।

पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 2 मार्च, 24 और 25 मार्च के पश्चिम बंगाल प्रवास से शुरुआत की। इसके बाद 8, 9, 20, 22, 23 और 25 अप्रैल को उन्होंने लगातार बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यक्रम किए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में लगभग 20 जनसभाएं और रैलियां कीं। उन्होंने हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाए। दूसरे और अंतिम चरण के मतदान से पहले 27 अप्रैल को प्रचार के आखिरी दिन उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए चार प्रमुख जनसभाओं और रोड-शो में हिस्सा लिया। ​इनके अलावा केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी 19, 20, 25 और 26 अप्रैल को जनसभाएं कर पार्टी की स्थिति मजबूत की।

​पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के सभी बड़े नेताओं के भाषणों में एक समानता थी, वह यह थी कि राज्य में ‘सिंडिकेट राज’ को खत्म करने का संकल्प और ‘घुसपैठियों’ के कारण राज्य की बदलती डेमोग्राफी और सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से उठाना।

28 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा टीएमसी सरकार के खिलाफ जारी किए गए आरोप पत्र से लेकर पीएम मोदी की विजय संकल्प सभाओं तक, भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पश्चिम बंगाल का असली और सर्वांगीण विकास इस तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार के नेटवर्क वाली टीएमसी सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद ही संभव है।

दूसरी तरफ लोकतंत्र के उत्सव में बंगाल के मतदाताओं ने भी उत्साह से भाग लिया और रिकॉर्ड मतदान कर अगली सरकार के गठन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। अब, लोगों की निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आएंगे। उसके बाद ही पता चलेगा कि बंगाल में किसकी सरकार बनेगी।

Leave feedback about this

  • Service