September 12, 2026
National

वैश्विक तनाव के बीच ब्रिक्स की अहमियत बढ़ी, रिटायर्ड कमोडोर बोले- पीएम मोदी जैसे निर्विवाद नेता कर रहे अध्यक्षता

BRICS’ importance has grown amidst global tensions; retired Commodore notes that the bloc is being led by an undisputed leader like PM Modi.

वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच भारत में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का महत्व और भी बढ़ गया है। रक्षा विशेषज्ञ कमोडोर (रिटायर्ड) रंजीत राय ने कहा कि जब रूस-यूक्रेन युद्ध चौथे साल में है और पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल संघर्ष गहरा रहा है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन बेहद अहम है।

रंजीत राय ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व काफी बढ़ गया है। एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया है। इजरायल गाजा में हमास और लेबनान में लगातार कार्रवाई कर रहा है, जबकि हूती अब सऊदी अरब पर हमले की तैयारी में हैं। ऐसे नाजुक समय में यह बैठक बेहद अहम हो जाती है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी जैसे निर्विवाद नेता कर रहे हैं, जिनके दुनिया के तमाम बड़े नेताओं से मित्रतापूर्ण संबंध हैं। उन्होंने शी जिनपिंग को आमंत्रित किया है जो अगले दिन पहुंच रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति पुतिन पहले ही आ चुके हैं और द्विपक्षीय वार्ता कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स से जुड़ा व्यापार सम्मेलन भी चल रहा है और आखिरकार सब कुछ अर्थव्यवस्था पर ही आकर टिकता है। 11 देशों वाला ब्रिक्स समूह अब दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यही वजह है कि ब्रिक्स देश अब संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अपनी बड़ी भूमिका और हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। जब ग्लोबल साउथ भारत मंडपम में जुटा है, तो पश्चिम और यूरोप की नजरें भी इसी पर टिकी हैं। यह सम्मेलन बहुत अच्छी तरह से आयोजित किया गया है और उम्मीद है कि इस बार पिछले सम्मेलन की तरह नहीं, जहां यूएई और ईरान किसी एक बयान पर सहमत नहीं हो पाए थे, बल्कि इस बार सम्मेलन के अंत में एक ठोस और सुनने लायक संयुक्त बयान सामने आएगा।

प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात अमेरिका और पश्चिमी देशों को क्या संदेश देती है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच मोदी-पुतिन संबंध भारत के रक्षा और रणनीतिक हितों के लिए कितने अहम हैं, इस सवाल पर रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत पश्चिम विरोधी नहीं है, भारत किसी का विरोधी नहीं है। प्रधानमंत्री हमेशा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करते हैं, यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। अगर सभी देश मिलकर सहयोग करें तो पूरी दुनिया को फायदा होगा।

विशेषज्ञ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी मुलाकात की। अमेरिका एक महाशक्ति है और वह इजरायल के साथ खड़ा है, जो खुद एक बड़ी सैन्य शक्ति है। इजरायल गाजा में लोगों पर हमले कर रहा है, लेबनान पर कार्रवाई कर रहा है और इसे अपनी सुरक्षा के नाम पर सही ठहराता है, जबकि वह फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा है। ये सभी अहम मुद्दे राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई बातचीत में जरूर उठे होंगे और ईरान के राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक में भी उठे होंगे। हालांकि हर बात सार्वजनिक नहीं की जाएगी। प्रधानमंत्री बखूबी जानते हैं कि भारत इन वैश्विक संकटों में क्या और कितना योगदान दे सकता है।

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