गुरुवार को नूरपुर के जवाली पुलिस स्टेशन में पोंग बांध से विस्थापित हुए एक व्यक्ति के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज किया गया। उस व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में उसकी जमीन बेचने के लिए उसके नाम पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई थी। पुलिस के अनुसार, जवाली के सुखर चौधरी गांव के निवासी बलवीर सिंह पर पोंग बांध परियोजना के कारण विस्थापित हुए शिकायतकर्ता को आवंटित जमीन को बेचने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप है। भरमार निवासी जगदीश चंद ने अपनी शिकायत में बताया कि पोंग बांध के निर्माण के कारण विस्थापित होने के बाद उन्हें राजस्थान के जैसलमेर जिले में कृषि भूमि आवंटित की गई थी। उन्होंने जमीन की खेती के लिए एक केयरटेकर नियुक्त किया था। उन्होंने बताया कि 27 जुलाई को उनके केयरटेकर ने उन्हें फोन पर बताया कि बलवीर सिंह ने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर उनकी जमीन बेचने के लिए स्थानीय पटवारी से संपर्क किया है। केयरटेकर ने उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से कथित फर्जी दस्तावेज की एक तस्वीर भी भेजी।
बीबीएमबी के सेवानिवृत्त कर्मचारी जगदीश चंद ने दावा किया कि दस्तावेज़ में उल्लिखित आधार नंबर किसी अन्य व्यक्ति का है, जो प्रतिरूपण का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा दस्तावेजों पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं, जबकि कथित तौर पर उनकी प्रतिरूपण करने वाले व्यक्ति ने पावर ऑफ अटॉर्नी पर अंगूठे का निशान लगाया था।
अतिरिक्त एसपी धर्म चंद वर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 336(4), 340(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने आगे बताया कि विवादित पावर ऑफ अटॉर्नी कथित तौर पर जवाली स्थित सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में निष्पादित की गई थी और मामले की जांच जारी है।

