राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) द्वारा फिरोजपुर स्थित वेरका मिल्क प्लांट के महाप्रबंधक डॉ. सुरजीत सिंह भादौर द्वारा दायर शिकायत पर नए सिरे से जांच का आदेश दिए जाने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने परविंदर सिंह और गुरबिंदर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
यह मामला भादौर द्वारा जाति आधारित उत्पीड़न, सार्वजनिक मानहानि और उनकी नौकरी को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों के आरोपों से संबंधित है। एनसीएससी ने 1 सितंबर, 2026 को उन पर हुए कथित क्रूर हमले का भी संज्ञान लिया। भदौर ने 31 जुलाई, 2024 को एनसीएससी को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा गया था कि लुधियाना स्थित वेरका मिल्क प्लांट और पटियाला स्थित मिल्क प्लांट में महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत रहते हुए उन्हें जातिगत उत्पीड़न और वित्तीय गबन के झूठे आरोपों का सामना करना पड़ा था।
उनकी शिकायत के अनुसार, 19 जुलाई, 2024 को चंडीगढ़ के किसान भवन में लुधियाना स्थित वेरका मिल्क प्लांट के तत्कालीन निलंबित निदेशक गुरबिंदर सिंह और मोहाली स्थित मिल्क प्लांट के पूर्व अध्यक्ष परमिंदर सिंह चालकी ने किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी।
भदौर ने आरोप लगाया कि 2012-13 में लुधियाना संयंत्र में अपनी तैनाती के दौरान लगभग 1.11 करोड़ रुपये के गबन के झूठे आरोप उनके खिलाफ लगाए गए थे। उन्होंने आयोग को बताया कि उनकी तैनाती की अवधि के दौरान पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन लिमिटेड से संबद्ध दूध संयंत्रों और इकाइयों की विभागीय जांच और एक विशेष ऑडिट किया गया था और कोई अनियमितता नहीं पाई गई थी।
12 सितंबर, 2025 को हुई सुनवाई में, एनसीएससी ने पाया कि परमिंदर सिंह और गुरबिंदर सिंह ने कथित तौर पर भादौर के खिलाफ झूठे आरोप लगाए और सार्वजनिक रूप से उनका अपमान किया। एनसीएससी ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के तहत, संबंधित बीएनएस प्रावधानों के साथ, एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की सिफारिश की।
हालांकि, चंडीगढ़ पुलिस ने बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग की जांच करने पर बताया कि उसमें अत्याचार से संबंधित कोई शब्द नहीं मिले और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हो सके। कानूनी राय के आधार पर मामला बंद कर दिया गया।
15 सितंबर, 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, एनसीएससी ने पाया कि उसकी पिछली सिफारिश पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी और भादुर से संपर्क करके उनका बयान दर्ज नहीं कराया गया था। आयोग ने इस जानकारी पर भी ध्यान दिया कि उन पर कथित तौर पर 1 सितंबर को एक क्रूर हमला हुआ था और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था।
निर्देशों के बाद, 25 सितंबर, 2026 को सेक्टर 36 पुलिस स्टेशन में परविंदर सिंह और गुरबिंदर सिंह के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(आर), 3(1)(यू) और बीएनएस की धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया।
एनसीएससी ने भादौर का बयान तुरंत दर्ज करने, नए सिरे से जांच शुरू करने और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उसने यह भी सिफारिश की है कि पूर्व जांच अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई न करने के आरोप में एससी/एसटी अधिनियम की धारा 4 के तहत कार्यवाही शुरू की जाए। 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।

