August 22, 2026
Entertainment

चिरंजीवी की पहली क्रश, जिससे दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं कर पाए एक्टर

Chiranjeevi’s first crush—the one to whom the actor couldn’t muster the courage to confess his feelings.

साउथ सिनेमा में जब बड़े सितारों की बात होती है तो चिरंजीवी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। दशकों तक पर्दे पर एक्शन, डांस और दमदार अंदाज से दर्शकों को दीवाना बनाने वाले चिरंजीवी की जिंदगी में भी एक ऐसा दौर था, जब वह बस एक आम कॉलेज स्टूडेंट थे।

उन दिनों का एक किस्सा बेहद दिलचस्प है, जिसे चिरंजीवी ने खुद एक इंटरव्यू में सुनाया था। उन्होंने बताया था कि उस दौर में उन्हें एक टीचर पर क्रश था, लेकिन वह कभी अपने दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे।

22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश में जन्मे चिरंजीवी का असली नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है। उनके पिता कोनिडेला वेंकट राव पुलिस विभाग में काम करते थे। चिरंजीवी की पढ़ाई अलग-अलग जगहों पर हुई और आगे चलकर उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई की। इसके बाद अभिनय का सपना उन्हें चेन्नई के मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट तक ले गया।

उनके ‘चिरंजीवी’ नाम के पीछे की कहानी भी काफी खास है। उनका परिवार अंजनेय, यानी भगवान हनुमान, की पूजा करता था। उनकी मां ने उन्हें ‘चिरंजीवी’ नाम से फिल्मों में आने की सलाह दी। इस नाम का अर्थ है- अमर। यही नाम आगे चलकर भारतीय सिनेमा में उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया।

फिल्मों में आने से पहले चिरंजीवी ने अपने कॉलेज के दौर को खूब एन्जॉय किया। एक पॉडकास्ट में जब उनसे पहली क्रश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कॉलेज के दिनों का एक किस्सा याद किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में उन्हें बायोलॉजी में काफी दिलचस्पी थी। इसी दौरान उन्हें इस सब्जेक्ट की टीचर पसंद आने लगी थीं। वह मेरी पढ़ाई की तारीफ करती थी।

चिरंजीवी ने इस किस्से के बारे में बात करते हुए आगे कहा कि उन्होंने कभी टीचर को नहीं बताया कि वह उन्हें पसंद करते हैं और न ही कोई लव लेटर लिखा। कॉलेज के दिनों में उनका ध्यान पढ़ाई, नाटक और अभिनय जैसी चीजों में था।

चिरंजीवी ने 1978 में ‘प्रणाम खरीदू’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की। उन्होंने ‘पुनाधिरल्लू’ में पहले काम किया था, लेकिन वह बाद में रिलीज हुई। शुरुआती दौर में उन्होंने हीरो के साथ-साथ एंटी-हीरो और नेगेटिव किरदार भी निभाए। फिर 1983 में आई ‘कैदी’ ने उनका पूरा करियर बदल दिया। फिल्म की सफलता के बाद वह तेलुगु सिनेमा के बड़े सितारों में शामिल हो गए।

इसके बाद ‘स्वयं कृषी’, ‘रुद्रवीणा’, ‘गैंग लीडर’, ‘घराना मोगुडु’, ‘इंद्रा’, ‘टैगोर’ और ‘शंकर दादा एमबीबीएस’ जैसी फिल्मों ने उन्हें नई पहचान दी। ‘रुद्रवीणा’ के लिए उन्हें अभिनय के साथ फिल्म निर्माण के स्तर पर भी सराहना मिली, जबकि ‘स्वयं कृषी’ और ‘इंद्रा’ के लिए उन्हें नंदी पुरस्कार मिले। वह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ के भी कई बार विजेता रहे हैं।

करीब एक दशक के फिल्मी ब्रेक के बाद चिरंजीवी ने 2017 में ‘कैदी नंबर 150’ से वापसी की। इसके बाद ‘सई रा नरसिम्हा रेड्डी’, ‘आचार्य’, ‘गॉडफादर’ और ‘वॉल्टेयर वीरय्या’ जैसी फिल्मों में नजर आए। 2024 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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