June 5, 2026
National

प्रकृति का संरक्षण हमारी संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा: पीएम मोदी

Conservation of nature is an integral part of our culture and traditions: PM Modi

5 जून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ‘सुभाषितम’ संदेश शेयर किया। इस पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रकृति के संरक्षण पर बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति का संरक्षण हमारी संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा है।

एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों का भी अभिन्न हिस्सा है। इस ‘सुभाषितम’ संदेश के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत का एक श्लोक भी शेयर किया है। यह श्लोक इस प्रकार है: “मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥”

इस श्लोक का अर्थ है कि वायु हमारे लिए आनंददायक और कल्याणकारी रूप से प्रवाहित हो, नदियां जीवनदायिनी और पोषणकारी जल प्रदान करें और औषधियां तथा वनस्पतियां समस्त जीव-जगत के लिए आरोग्य और सुख का कारण बनें।

इससे पहले, पीएम मोदी ने गुरुवार को ‘सुभाषितम’ संदेश में लोगों से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है।

पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा था कि योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से जीवन संतुलित और ऊर्जावान बनता है। इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत का श्लोक भी शेयर किया था, जो इस प्रकार है, “योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन। योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥”

इस श्लोक का अर्थ यह है कि मन की चित्त वृत्तियों को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद द्वारा शुद्ध करने वाले मुनियों में सर्वश्रेष्ठ महर्षि पतञ्जलि को मैं दोनों हाथ जोड़कर नमन करता हूं।

इसी तरह बुधवार को ‘सुभाषितम’ संदेश में पीएम मोदी ने एकजुटता को लेकर संदेश शेयर किया था। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संदेश दिया था कि एकजुटता और आपसी सहयोग से राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

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