July 2, 2026
National

‘चौहान’ टीजर पर विवाद : क्षत्रिय परिषद ने कहा, ‘बॉलीवुड फिल्मों के जरिए एजेंडा आगे बढ़ाता है’

Controversy over ‘Chauhan’ teaser: Kshatriya Parishad says, ‘Bollywood pushes an agenda through its films’

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता अजय देवगन की आगामी एक्शन फिल्म ‘चौहान’ टीजर रिलीज के बाद से ही विवादों में घिरा है। इसी बीच क्षत्रिय परिषद के को-फाउंडर और मेंबर अभिषेक आनंद ने बुधवार को आईएएनएस से बात करते हुए, ‘चौहान’ के टीजर विवाद पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि ‘चौहान’ मूवी जो बनी है, वह किसी पत्थरबाजी की घटना पर आधारित है, लेकिन फिल्म में जिस प्रकार के डायलॉग्स का इस्तेमाल किया गया है। वह दो समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ करने के लिए किया गया है। अगर पठानों को इस प्रकार से टारगेट किया जाए, तो क्या कश्मीर में पठान रहते हैं। पठान तो अफगानिस्तान में रहते हैं। अगर इसी प्रकार का ऐतिहासिक डायलॉग मूवी में डालना था, तो इसके लिए राजा मानसिंह के किरदार का उपयोग फिल्म में करना चाहिए था।

उन्होंने बताया कि राजा मानसिंह का जो ध्वज है, वह पंचरंगा है, जो उन्होंने अफगानिस्तान के पठानों की पांचों ट्राइब्स को हराने के बाद अपने ध्वज में जोड़ा था, जो कि पहले सिर्फ कचनार का हुआ करता था। बॉलीवुड की यह परंपरा रही है कि वह इतिहास को अनुचित रूप से पर्दे पर दर्शाता है। ‘चौहान’ फिल्म के डायलॉग का न तो कोई सिर है और न ही पैर। न तो कश्मीर में पठान रहते हैं और न ही चौहानों की पठानों से विवाद में कोई भूमिका है।

उन्होंने कहा कि बॉलीवुड की शुरू से ही आदत है कि जब जरूरत होता है, वह क्षत्रिय और राजपूत पहचान का इस्तेमाल कर लेते हैं और जब इतिहास पर आधारित मूवी को बनाने की बात आती है, तब यह अनुचित जानकारी पर्दे पर प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अभिनेता अजय देवगन की एक मूवी ‘तान्हाजी’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस फिल्म में भी उदयभान के किरदार को क्या से क्या बनाकर दर्शाया गया। उन्होंने ‘जोधा-अकबर’ मूवी की बात की और कहा कि इस तरह की फिल्मों का निर्माण होता है, लेकिन एक भी इतिहासकार और बुद्धिजीवी इस पर बात नहीं करते। वे सवाल नहीं पूछते।

अभिषेक ने बॉलीवुड के एजेंडा सेट करने के तरीके पर बात की और कहा कि बॉलीवुड फिल्मों के माध्यम से दो तरीके से एजेंडा सेट करता है। पहला ‘तान्हाजी’ और दूसरा ‘जोधा-अकबर’ के माध्यम से। बॉलीवुड के जो भी डॉयरेक्टर हैं, वे कभी भी बाबू कुंवर सिंह और धर्मन बाई के ऊपर क्यों नहीं फिल्म बनाते हैं?

उन्होंने बताया कि धर्मन बाई, जिन्हें धरमन देवी या धरमन बीवी के नाम से भी जाना जाता है, वह एक मुस्लिम समुदाय से आती थी। वह आरा की एक गायिका थी, जिन्होंने 1857 के सबसे बड़े नायकों में से एक बाबू कुंवर सिंह के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा और बाबू कुंवर सिंह की गोद में ही दम तोड़कर वीरगति को प्राप्त हुईं। इस प्रकार की कहानी बॉलीवुड को रास नहीं आएगी। बॉलीवुड को सिर्फ उस प्रकार की फिल्मों की कहानी रास आएगी, जो उनके एजेंडे में फिट हो। हमारे इतिहास को ब्लैक एंड व्हाइट किया जा रहा है। बॉलीवुड को सही इतिहास पर्दे पर दर्शाना चाहिए।

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