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दांडी सत्याग्रह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक निर्णायक मोड़ : उपराष्ट्रपति

Dandi Satyagraha a turning point in India's freedom movement: Vice President

12 मार्च । महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए निकाली गई ‘दांडी नमक सत्याग्रह’ की वर्षगांठ पूरे देश में मनाई जा रही है। जगह-जगह विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन कर महात्मा गांधी को याद किया जा रहा है।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी इस मौके पर महात्मा गांधी को याद करते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा है, “महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1930 में इसी दिन शुरू हुआ ऐतिहासिक दांडी सत्याग्रह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक निर्णायक मोड़ था, जिसने सत्य और अहिंसा के आदर्शों के माध्यम से राष्ट्रव्यापी आत्मनिर्भरता की भावना को प्रेरित किया। मैं बापू और इस ऐतिहासिक मार्च में भाग लेने वाले सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं। जैसे-जैसे हम आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर रहे हैं और विकसित भारत के सपने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस आंदोलन द्वारा प्रेरित आत्मनिर्भरता की भावना हमारे राष्ट्र के मार्ग का मार्गदर्शन करती रहेगी।”

वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट में लिखा, 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा साबरमती से दांडी तक आरंभ किया गया दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय है। नमक कानून के विरुद्ध यह शांतिपूर्ण आंदोलन सत्य, अहिंसा और दृढ़ संकल्प की शक्ति का प्रतीक बना। इस ऐतिहासिक आंदोलन ने पूरे देश को अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर खड़े होने की प्रेरणा दी और स्वतंत्रता व स्वाभिमान की भावना को नई ऊर्जा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण पड़ाव के सूत्रधार महात्मा गांधी और सभी समर्पित सत्याग्रहियों को सादर नमन।

भाजपा नेता डॉ. महेंद्र सिंह ने पोस्ट में लिखा, “1930 में आज ही के दिन ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह शुरू किया गया था, जिसने हर आयु-वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। दांडी यात्रा में सम्मिलित होने वाले सभी सत्याग्रहियों को शत-शत नमन।”

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