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भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दतिया उपचुनाव, ट्रांसजेंडर उम्मीदवार ने खींचा ध्यान

Datia by-election turns into a battle of prestige for BJP and Congress; transgender candidate draws attention.

18 जुलाई । मध्य प्रदेश में दतिया उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए एक अहम मुकाबला बन गया है। नामांकन वापस लेने के बाद अब मैदान में 22 उम्मीदवार बचे हैं।

हालांकि चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच है, लेकिन ट्रांसजेंडर नेता संजना सिंह किन्नर की उम्मीदवारी ने कैंपेन में एक नया सामाजिक और राजनीतिक पहलू जोड़ दिया है।

सत्ताधारी भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है और अपनी संगठनात्मक ताकत के दम पर उस सीट को वापस जीतने की कोशिश कर रही है जिसे उसने 2023 के विधानसभा चुनावों में गंवा दिया था।

कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है और अपने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बावजूद इस सीट को बनाए रखने की उम्मीद कर रही है।

यह उपचुनाव तब जरूरी हो गया, जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 8 के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया।

भारती ने 2023 के विधानसभा चुनावों में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराकर भाजपा को चौंका दिया था और इस सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता के लंबे दबदबे को खत्म कर दिया था।

दतिया को राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीट माना जाता है, इसलिए यह उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। भाजपा के लिए जीत 2023 में मिली अप्रत्याशित हार की याद को मिटाने और इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने में मदद करेगी।

कांग्रेस के लिए सीट को बनाए रखने का मतलब यह होगा कि उपचुनाव की वजह बने हालात के बावजूद उसका समर्थन आधार बरकरार है।

अन्य उम्मीदवारों में संजना सिंह किन्नर ने ट्रांसजेंडर प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समावेश के मुद्दों को चुनावी चर्चा में लाकर ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि उन्हें मुख्य दावेदार नहीं माना जा रहा है, लेकिन उनके कैंपेन ने शहरी मतदाताओं और युवा वोटरों के बीच दिलचस्पी पैदा की है, जिससे इस मुकाबले को पारंपरिक भाजपा-कांग्रेस प्रतिद्वंद्विता से परे एक व्यापक सामाजिक नैरेटिव मिला है।

चुनाव आयोग ने 30 जुलाई को वोटिंग और 3 अगस्त को वोटों की गिनती तय की है।

चूंकि एक बैलेट यूनिट में केवल 16 नाम ही दिखाए जा सकते हैं, इसलिए हर पोलिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में दो बैलेट यूनिट लगाई जाएंगी। मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे वोटिंग बटन दबाने से पहले दोनों यूनिट को ध्यान से देख लें।

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