August 16, 2022
Delhi National

दिल्ली के असोला-भाटी माइंस वन क्षेत्र में 800 मिलियन गैलन पानी से शहर के भूजल को रिचार्ज करने की पहल

दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली के असोला-भाटी माइंस वन क्षेत्र का दौरा किया। यहां वर्षा और बाढ़ के पानी को इकट्ठा करने, भूजल को रिचार्ज करने और क्षेत्र को विश्वस्तरीय इको-पर्यटन गंतव्य में बढ़ाने के लिए अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर एक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया गया। साथ ही निर्देश दिया गया कि मोरिंगा, चेम्बू या हनी ट्री (डोम्बेया स्पेक्टाबिलिस), जामुन और विशेष किस्म के बांस आदि सहित एक लाख पेड़ लगाए जाएं। मास्टर प्लान के इको-टूरिज्म घटक में बटरफ्लाई ट्रेल्स, वाइल्डलाइफ ट्रेल्स, साइकिल ट्रैक्स, वॉकिंग ट्रैक्स, बर्ड-वाचिंग स्पॉट और रोपवे बनाने के प्रावधान भी शामिल होंगे।

मास्टर प्लान विशेषज्ञों और संस्थानों के परामर्श से संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक समिति द्वारा तैयार किया जाएगा। एलजी, सीएम और डिप्टी सीएम 14 गड्ढों (4 बड़े और 10 छोटे) को जलाशयों में विकसित करने की वांछनीयता पर एकजुट हैं। इनकी क्षमता 800 मिलियन गैलन से अधिक है, जो शहर के भूजल को रिचार्ज करने में मदद करेंगे। तद्नुसार, असोला-भाटी खान क्षेत्र के कायाकल्प और पुनर्विकास के लिए एक मास्टर प्लान बनाने का निर्णय लिया गया।

31 मई 2022 को उपराज्यपाल के दौरे के बाद, जब उन्होंने अधिकारियों को संभावनाओं का पता लगाने का निर्देश दिया था, और मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक की थी। संबंधित विभागों के प्रभारी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रविवार को इस क्षेत्र की संयुक्त यात्रा की है।

यह बताया गया कि वन अभ्यारण्य के बाहर निचले इलाकों में लगातार जलभराव और बाढ़ देखी जाती है, जिनमें से लगभग 35 प्रतिशत उच्च खदान क्षेत्र के ढाल से ही आते हैं। इसके अलावा वन क्षेत्र के ठीक बाहर बहने वाले मुख्य नालों में भी मानसून के दौरान ओवरफ्लो होने का खतरा रहता है।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे एक तरफ बांध बनाकर ढलानों से बहते पानी को रोके रखें और एकत्रित पानी को उठाने के तरीके और साधन तैयार करें। साथ ही भट्टी माइंस क्षेत्र के गड्ढों में नालियों और निचले इलाकों से पानी को ऊपर उठाने और दबाव डालने के लिए भी निर्देशित किया गया है।

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