एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने गुरुवार रात अपने बेटे की बॉडी को पोस्ट-मॉर्टम के लिए चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में ले जाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार प्रोटेस्ट करने वालों के खिलाफ दर्ज केस की लिखित कैंसलेशन रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस प्रोसेस के लिए मानेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बुधवार को विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवान, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और सीनियर अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में केस कैंसिल करने पर सहमत हो गई थी।
इससे पहले गुरुवार शाम को परिवार मानसा सिविल हॉस्पिटल पहुंचा, जहां एक एम्बुलेंस बॉडी को PGIMER ले जाने के लिए इंतज़ार कर रही थी। हालांकि, परिवार ने करीब तीन घंटे इंतज़ार करने के बाद भी बॉडी को ट्रांसफर करने से मना कर दिया। भीम ने बाद में प्रोटेस्ट साइट पर फैसले का ऐलान किया और कहा कि आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच, लाखा सिधाना और मोहनजीत शेरोन को मानसा कोर्ट के ऑर्डर के बाद गुरुवार शाम को नाभा जेल से रिहा कर दिया गया। उन्हें 28 अक्टूबर को दर्ज हत्या की कोशिश के एक केस में गिरफ्तार किया गया था। यह केस एक पुलिसवाले की शिकायत पर दर्ज किया गया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शनकारियों ने उस पर तब हमला किया जब 32 साल के मामूली किसान दलजीत सिंह की बॉडी, जिसकी मौत शक के तौर पर ड्रग ओवरडोज़ से हुई थी, मानसा ले जाई जा रही थी।
अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किए गए नौ अन्य लोगों को भी गुरुवार शाम को बठिंडा जेल से रिहा कर दिया गया। इससे पहले छह और लोगों को रिहा किया गया था।


Leave feedback about this