September 19, 2026
National

दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी : 2028 से सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया, 2027 से ई-ऑटो ही होंगे रजिस्टर

Draft of new EV policy released in Delhi: Only electric two-wheelers will be registered from 2028, e-autos from 2027

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030’ का ड्राफ्ट जारी किया है। चार साल की यह नीति इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को तेजी से बढ़ावा देने, हवा की गुणवत्ता सुधारने और साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है।

यह पॉलिसी भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो स्वच्छ हवा और प्रदूषण मुक्त वातावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानती है। साथ ही, एमसी मेहता बनाम भारत संघ के फैसले और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 व मोटर वाहन अधिनियम, 1988 जैसे कानूनों का भी इसमें आधार लिया गया है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सर्दियों के दौरान 23 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाहन जिम्मेदार हैं। खास बात यह है कि दोपहिया वाहन कुल वाहनों का करीब 67 प्रतिशत हैं, इसलिए इन्हें तेजी से इलेक्ट्रिक में बदलना बेहद जरूरी माना गया है। इसके अलावा तीन पहिया, कमर्शियल कार, और छोटे मालवाहक वाहन (एन1) भी ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।

इस नीति के मुख्य उद्देश्य सभी वाहन वर्गों में ईवी अपनाने को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करना हैं।

सरकार ईवी खरीदने पर सीधे बैंक खाते में सब्सिडी (डीबीटी) देगी। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले साल 10,000 रुपए प्रति किलोवाट (अधिकतम 30,000 रुपए), दूसरे साल 6,600 रुपए (अधिकतम 20,000 रुपए) और तीसरे साल 3,300 रुपए (अधिकतम 10,000 रुपए) की सब्सिडी मिलेगी।

ई-ऑटो (तीन पहिया) के लिए पहले साल 50,000 रुपए, दूसरे साल 40,000 रुपए और तीसरे साल 30,000 रुपए की मदद दी जाएगी। वहीं छोटे इलेक्ट्रिक ट्रक (एन1) पर पहले साल 1 लाख रुपए, दूसरे साल 75,000 रुपए और तीसरे साल 50,000 रुपए तक का लाभ मिलेगा।

पुरानी बीएस-IV या उससे नीचे की गाड़ी स्क्रैप करने पर भी प्रोत्साहन मिलेगा। दोपहिया पर 10,000 रुपए, तीन पहिया पर 25,000 रुपए, कार पर 1 लाख रुपए (30 लाख तक की कीमत वाली, पहले 1 लाख लोगों तक) और एन1 ट्रक पर 50,000 रुपए मिलेंगे।

दिल्ली में रजिस्ट्रेशन कराने पर सभी ईवी को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों को पूरी छूट और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 50 प्रतिशत छूट मिलेगी, जबकि 30 लाख से ऊपर की कारों को कोई छूट नहीं मिलेगी।

चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह संस्था प्लानिंग, लोकेशन तय करने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। साथ ही एक डिजिटल पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया जाएगा ताकि चार्जिंग स्टेशन लगाना आसान हो सके।

वाहन निर्माता कंपनियों को हर डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना होगा। इसमें 2-3 व्हीलर और 4 व्हीलर के लिए अलग-अलग चार्जिंग पॉइंट होंगे।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति बैटरी कलेक्शन सेंटर बनाने और सुरक्षित निपटान के लिए नियम तय करेगा। बैटरी ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा ताकि रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से हो सके।

1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक तीन पहिया ही रजिस्टर होंगे। 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया ही रजिस्टर किए जाएंगे। स्कूल बसों में भी ईवी का हिस्सा बढ़ाना अनिवार्य होगा। पहले 2 साल में 10 प्रतिशत, तीसरे साल 20 प्रतिशत, और 2030 तक 30 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है।

सरकारी विभागों में नई खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी। दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी। वहीं, डिलीवरी और फ्लीट कंपनियों को 2026 से पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने से रोका जाएगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग इस नीति को लागू करेगा और एक विशेष ईवी सेल बनाया जाएगा।

यह पॉलिसी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे ले जाने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है।

Leave feedback about this

  • Service