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गुजरात सरकार के ‘शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव’ से स्कूलों में ड्रॉपआउट दरों में आई कमी

Drop in school dropout rates due to the Gujarat government's 'Shala Praveshotsav and Kanya Kelavani Mahotsav'

हर साल की तरह इस बार भी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने और उनमें शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने के लिए गुजरात में ‘शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव’ का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में 23 जून को राज्य के शिक्षा विभाग की ओर से इस तीन दिवसीय महोत्सव के 24वें संस्करण की शुरुआत की गई। ‘शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव’ से स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने वडनगर के ऐतिहासिक बीएन हाई स्कूल से कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कक्षा 1 से 11वीं तक के स्टूडेंट्स को प्रवेश दिलाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 24 साल पहले शुरू किया गया यह अभियान बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने और स्कूल ड्रॉपआउट कम करने के लिहाज से बेहद सफल साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि आज इस कन्या केलवणी और शाला प्रवेशोत्सव पहल की वजह से हमें ड्रॉपआउट की समस्या दूर करने में दो तरह से फायदा हुआ है। पहला स्टूडेंट्स के सौ प्रतिशत नामांकन में सफलता मिली है और दूसरा नामांकन के बाद ड्रॉपआउट रेट एक प्रतिशत से भी कम हो गया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल की बहुत बड़ी कामयाबी है।

शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव- 2026 के अंतर्गत स्कूल में एडमिशन लेने वाले बच्चे बेहद उत्साहित दिखाई दिए। जाहिर है कि उन्हें स्कूल में न केवल नए दोस्त मिलेंगे, बल्कि पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल भी मिलेगा, साथ ही खेलकूद के मौके भी मिलेंगे।

छात्रा जिया परमार ने कहा कि हमें अपने स्कूल की तरफ से किताबें और यूनिफॉर्म मिलती है। आज हमारे स्कूल में शाला प्रवेशोत्सव था, यह प्रवेश उत्सव हमारे लिए बहुत अच्छा है, हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

छात्रा सोनाक्षी ने कहा कि मुझे स्कूल का पहला दिन बहुत पसंद है। मेरा स्कूल का पहला दिन इसलिए भी अच्छा होता है क्योंकि हमें नई किताबें, बूट्स-मोजे मिलते हैं और छुट्टियों के बाद मैडम से बात करने का मौका मिलता है।

राज्य सरकार शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव के माध्यम से बेटियों की शिक्षा पर भी पूरा जोर दे रही है। अभिभावकों ने सरकार की इस पहल की सराहना की और कहा कि इससे जहां बच्चों की नींव मजबूत हो रही है, वहीं उनका भविष्य भी उज्ज्वल हो रहा है।

अभिभावक नरेंद्रभाई बारोट ने कहा कि सरकार के शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव की वजह से बच्चों में बहुत उत्साह है। इससे बच्चे पढ़ेंगे और सफल बनेंगे। साथ ही भविष्य में अच्छा जीवन जी सकेंगे।

अभिभावक आशीष प्रजापति ने कहा कि बालिकाओं और बालकों को यहां मूलभूत सुविधाएं मिलती हैं, जैसे किताबें, ड्राइंग आर्ट, स्कूल बैग, पानी की बोतलें जैसी चीजें मिलती हैं। यहां मूलभूत विषयों पर ध्यान दिया जाता है। इसके साथ ही स्कूल में आने के बाद उन्हें टेक्नोलॉजी के साथ शिक्षा भी मिलती है।

शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव के अंतर्गत राज्य के हर जिले और तालुका में भव्य आयोजन किए गए, जहां राज्य सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाया। इस वर्ष पूरे राज्य के 38,400 सरकारी स्कूलों में कुल 28 लाख 58 हजार से अधिक बच्चों को प्रवेश देने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें बालवाटिका, कक्षा 1, कक्षा 9 और कक्षा 11 में प्रवेश लेने वाले छात्र शामिल थे।

जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने बताया कि शिक्षा से कोई बच्चा वंचित न रहे, इसके पीछे का यह मुख्य उद्देश्य है और यह जन आंदोलन बन गया है। पूरा समाज इसमें जुड़ा है। अधिकारी घर-घर जा रहे हैं। बाल वाटिका से पहली कक्षा, 5वीं से छठवीं क्लास, 8वीं से 9वीं क्लास में और दसवीं से 11वीं कक्षा में 100 प्रतिशत विद्यार्थियों का प्रवेश हो सके, इसके लिए यह प्रवेश उत्सव एक ज्ञान उत्सव बन गया है।

2003 में शुरू हुए अभियान की वजह गुजरात के एजुकेशन सेक्टर में उल्लेखनीय बदलाव आया है। सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी से जहां आज स्कूलों में नामांकन दर 100 प्रतिशत पहुंच गई है, वहीं ड्रॉपआउट दर 37 से घटकर 1 प्रतिशत से भी कम हो गई है। कुल मिलाकर सरकार का यह अभियान समाज में शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने और हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सफल साबित हो रहा है।

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