September 13, 2026
National

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस : माइक्रोन के सेमीकंडक्टर प्लांट को 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा के साथ 12 घंटे की शिफ्ट की मंजूरी

Ease of Doing Business: Micron’s semiconductor plant gets approval for 12-hour shifts with a 48-hour weekly work limit.

भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में गुजरात की स्थिति अधिक मजबूत बने, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। इस निर्णय के अंतर्गत माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साणंद स्थित प्लांट में 12 घंटे की कार्य शिफ्ट चलाने की मंजूरी दी गई है।

गुजरात में इस प्रकार की यह पहली मंजूरी है। राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रोत्साहन देकर नए रोजगार पैदा होंगे। इस 12 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारियों के लिए सप्ताह में कुल कामकाज का समय 48 घंटे ही रहेगा।

यह मंजूरी ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड, 2020 के प्रावधानों के तहत दी गई है, जो 21 नवंबर, 2025 से समग्र देश में लागू हुआ है। यह कोड राज्य सरकारों को आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों के साथ कुछ परिस्थितियों में फैक्ट्रियों को निश्चित प्रावधानों से छूट देने का अधिकार देता है, परंतु यह भी सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों के साप्ताहिक कार्य के घंटे निर्धारित सीमा से अधिक न हों।

गुजरात के श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने कहा, ”ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड का मुख्य उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ कंप्लायंस को प्रोत्साहन देना है। कोड में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे के कामकाज का प्रावधान है, लेकिन उपयुक्त सरकार को फैक्ट्रियों के संदर्भ में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। गुजरात सरकार ने राज्य के व्यापक सार्वजनिक हित, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए इस प्रावधान का उपयोग किया है।”

बावलिया ने स्पष्टता करते हुए जोड़ा, “किसी भी औद्योगिक इकाई को कर्मचारियों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट रखने के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है। मंजूरी के बिना कोई भी औद्योगिक समूह कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट नहीं करा सकेगा। इस प्रकार का प्रावधान निश्चित उद्योगों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।”

गुजरात भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपना नेतृत्व अधिक मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में यह मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अग्रसर बनाने के विजन में सेमीकंडक्टर को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में स्थान दिया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बना है, जहां फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन जैसे क्षेत्रों में निरंतर निवेश हो रहा है।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी का साणंद प्लांट कंपनी के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में 5 लाख वर्ग फीट से अधिक क्लीनरूम क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-फ्लोर सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट क्लीनरूम में से एक क्लीनरूम होगा। वर्ष 2026 के दौरान यहाँ करोड़ों सेमीकंडक्टर चिप्स की असेंबली एवं टेस्टिंग शुरू होने की अपेक्षा है, जबकि 2027 से उत्पादन क्षमता हर वर्ष सैकड़ों मिलियन चिप्स तक पहुंचने की संभावना है।

सेमीकंडक्टर उत्पादन परंपरागत फैक्ट्रियों से अलग है, क्योंकि यहां अत्यंत नियंत्रित क्लीनरूम परिस्थिति में उत्पादन प्रक्रिया निरंतर चलती है। चिप असेंबली तथा टेस्टिंग के लिए अत्याधुनिक ऑटोमेटेड मशीनें 24 घंटे कार्यरत रहती हैं, जिसके कारण निरंतर उत्पादन बनाए रखना कार्यदक्षता एवं गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार 12 घंटे की शिफ्ट विश्वभर की सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयों में स्वीकृत कार्य पद्धति है। लंबी शिफ्ट के कारण शिफ्ट बदलने की संख्या कम होती है, क्लीनरूम में प्रवेश कम होता है, मशीनों का अधिक कार्यक्षम उपयोग होता है और अरबों रुपए के निवेश वाले प्लांट में निरंतर उत्पादन बनाए रखा जा सकता है। साथ ही, कर्मचारी सप्ताह में कम दिन काम करते हैं, जिससे कुल साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे ही रहता है।

राज्य सरकार ने इस मंजूरी के साथ श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए कड़ी शर्तें लागू की हैं। वयस्क कर्मचारी प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे काम कर सकेंगे, परंतु सप्ताह में कुल कामकाज का समय 48 घंटे से अधिक नहीं होगा। शेष दिनों को सवेतन अवकाश माना जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल अपनी स्वैच्छिक लिखित सहमति देने वाले कर्मचारी ही 12 घंटे की शिफ्ट में काम कर सकेंगे। राज्य सरकार ने यह भी निर्धारित किया है कि आराम के अंतराल सहित कुल कार्य समय प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक नहीं होगा।

कंपनी के लिए इस व्यवस्था के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों का अलग रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। साथ ही फैक्ट्रियों के चीफ इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर द्वारा लागू की गईं अतिरिक्त शर्तों का भी पालन करना होगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होगा, तो दी गई मंजूरी रद्द कर दी जाएगी और संबंधित संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने कहा, ”यह छूट राज्य की औद्योगिक प्रगति को गति देने, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने, नए रोजगार का सृजन करने और विशेष रूप से राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।”

सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विशेष नीति घोषित करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य था। इस नीति के तहत उद्योगों को व्यापक प्रोत्साहन एवं सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके परिणामस्वरूप इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूर हुए छह बड़े प्रोजेक्ट गुजरात को मिले हैं, जिनके माध्यम से लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इन प्रोजेक्टों से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की अपेक्षा है, जो भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के केन्द्र के रूप में गुजरात की स्थिति को और मजबूत बनाएगा।

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