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10 फरवरी: जब ‘भारत रत्न’ बने भीमसेन जोशी, संगीत को साधन नहीं, बल्कि साधना मानते थे

February 10: When Bhimsen Joshi was awarded the Bharat Ratna, he considered music not a means but a spiritual practice.

10 फरवरी । पंडित भीमसेन जोशी… एक ऐसी हस्ती जो भारत रत्न रहे और विश्व में भारतीय संगीत की खूबसूरती को पहुंचाया। भीमसेन जोशी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के उन महान कलाकारों में से एक हैं, जिनकी आवाज सुनकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाता है। उन्हें 10 फरवरी 2009 को उनके घर पुणे में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

पंडित जोशी किराना घराने से ताल्लुक रखते थे। वह ख्याल शैली और भजन गायन के लिए खास तौर पर प्रसिद्ध रहे। उनका जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक के गडग जिले में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। बचपन से ही उनका संगीत के प्रति गहरा लगाव था। संगीत को लेकर टशन इतना था कि स्कूल से लौटते समय वह रास्ते में ग्रामोफोन की दुकानों पर रुककर रिकॉर्ड सुनते और उनसे सीखने की कोशिश करते थे।

संगीत की दीवानगी ने मात्र 11 साल की उम्र में घर छोड़ने को मजबूर कर दिया, और वह गुरु की तलाश में निकल पड़े। उनके पास टिकट खरीदने के पैसे तक नहीं थे, इसलिए बिना टिकट ट्रेन में चढ़ गए। जब टीटीई ने टिकट मांगा, तो उन्होंने कहा कि पैसे नहीं हैं। टीटीई जुर्माना लगाने को तैयार हुए, तब भीमसेन ने राग भैरव गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। यात्री इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनका टिकट और जुर्माना तक भर दिया। इस तरह वह सम्मान बीजापुर पहुंचे।

उनकी संगीत यात्रा में गुरु सवाई गंधर्व का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने गुरु के घर रहकर कई सालों तक राग तोड़ी, पूरिया, भैरव और यमन आदि की तालीम ली। 19 साल की उम्र में उन्होंने पहली मंचीय प्रस्तुति दी और बाद में मुंबई में रेडियो कलाकार बने। पंडित जोशी संगीत को महज साधन नहीं, बल्कि साधना मानते थे। उन्होंने पिछले सात दशकों तक शास्त्रीय गायन किया। उनके गायन में गहराई, सुरों की शुद्धता और तानों की खूबसूरती अनोखी थी।

वह ख्याल के अलावा ठुमरी, तप्पा, भजन और नाट्य संगीत भी गाते थे। उनके पसंदीदा रागों में यमन, शुद्ध कल्याण, मारुबिहाग, बिहाग, बसंत बहार, मियां मल्हार, अभोगी और दरबारी शामिल थे। उनकी कला ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां दीं।

उनके योगदान को कई सम्मानों से नवाजा गया। साल 1972 में पद्मश्री, 1985 में पद्मभूषण और 1999 में पद्मविभूषण मिला। इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, कर्नाटक रत्न और महाराष्ट्र भूषण जैसे पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

पंडित भीमसेन जोशी ने 24 जनवरी 2011 को पुणे में अंतिम सांस ली।

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