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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की भूमि पर प्रस्तावित पर्यटन गांव का विरोध किया

Former Assembly Speaker opposed the proposed tourist village on the land of Palampur Agricultural University

राज्य विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और सुलह विधायक विपिन सिंह परमार ने आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की भूमि पर पर्यटन गांव स्थापित करने के अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित संस्थान की 112 हेक्टेयर प्रमुख भूमि पहले ही हस्तांतरित कर दी है।

परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालय के शिक्षकों, छात्रों और जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए जो विश्वविद्यालय की भूमि पर पर्यटन गांव स्थापित करने का विरोध कर रहे हैं।

मीडिया से बात करते हुए परमार ने कहा कि वह पालमपुर में पर्यटन गांव के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी शैक्षणिक संस्थान को शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए दी गई उसकी बहुमूल्य भूमि से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने सीएम को याद दिलाया कि मौजूदा सरकार में कृषि विभाग संभाल रहे चंद्र कुमार ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। कुमार ने कहा था कि अगर विश्वविद्यालय की जमीन किसी दूसरे विभाग को दे दी गई तो विश्वविद्यालय के विस्तार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। परमार ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने खेद जताया कि पिछले एक साल में राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति नियुक्त करने में विफल रही है। परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन अधिग्रहण करने के बजाय मुख्यमंत्री को नए कुलपति की नियुक्ति पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पालमपुर में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव पाइपलाइन में है। उन्होंने कहा कि सरकार को पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय केंद्र के समक्ष इस मुद्दे को उठाना चाहिए। परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता है।

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