September 28, 2026
Haryana

9 साल पुराने मामले में सीआईए के 4 पूर्व पुलिसकर्मियों ने हिसार की अदालत में आत्मसमर्पण किया

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक मैनेजर के कथित अपहरण और उसे ड्रग तस्करी के एक मामले में झूठा फंसाने के नौ साल पुराने मामले के संबंध में शुक्रवार को हिसार की एक अदालत में पांच आरोपियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें घटना के समय सीआईए में कार्यरत चार पुलिसकर्मी भी शामिल थे।

यह मामला बैंक अधिकारी और एक पुलिसकर्मी के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुआ, जिसका बेटा एक सड़क दुर्घटना में शामिल था। तत्कालीन एएसआई वीरेंद्र सिंह, धर्मबीर सिंह और सत्यवान तथा कांस्टेबल संदीप और मॉडल टाउन के चेतन ने न्यायिक मजिस्ट्रेट आयुष के समक्ष आत्मसमर्पण कर जमानत याचिका दायर की। अदालत ने सभी पांचों को 50,000 रुपये के बांड जमा करने पर जमानत दे दी। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को तय की गई है।

शिकायतकर्ता के वकील ने बताया कि यह मामला पंजाब के सुनाम निवासी वरिष्ठ बैंक प्रबंधक रमनजीत सिंह द्वारा वर्ष 2018 में दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। 16 दिसंबर, 2017 को उनकी कार एएसआई वीरेंद्र सिंह के पुत्र आशीष की कार से टकरा गई थी। शिकायतकर्ता ने माफी मांगी और मरम्मत का खर्च वहन करने की पेशकश की, लेकिन आरोप लगाया कि बाद में उन्हें फोन पर धमकी दी गई।

18 दिसंबर को जब वह 33 लाख रुपये नकद देकर कार खरीदने जा रहा था, तब आशीष, उसके पिता और कुछ अन्य लोगों ने उसकी कार को रोका, ईंटों से तोड़फोड़ की, उस पर हमला किया और उसे एक अन्य वाहन में बिठाकर सीआईए पुलिस स्टेशन ले गए। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने फोन पर एक वकील को घटना की जानकारी दी और जब उसे ले जाया जा रहा था तब उसने पुलिस स्टेशन को भी संदेश भेजा।

सीआईए पुलिस स्टेशन में, उसे निर्वस्त्र कर उसके साथ मारपीट की गई और उससे 90,000 रुपये छीन लिए गए। उसने बताया कि जब उसने इंस्पेक्टर कप्तान सिंह से उसे रिहा करने की गुहार लगाई, तो उसे धमकी दी गई कि पुलिस को संदेश भेजने के लिए उसे कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके बाद, उसकी कार से अफीम बरामद होने के आरोप में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

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