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2006 से 2026 तक, हमेशा ऐतिहासिक रही प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा

From 2006 to 2026, Prime Minister Modi's visits to Israel have always been historic.

25 फरवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इजरायल की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक होगी। वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करेंगे। इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘मोदी आर्काइव’ नामक अकाउंट ने उनकी ऐतिहासिक इजरायली यात्राओं और उससे जुड़ी तस्वीरों को शेयर किया है।

‘मोदी आर्काइव’ के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 2006 में पहला इजरायल दौरा किया था। वे इजरायल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी ‘एग्रीटेक-2006’ में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ गए थे, जिसमें भारत के कृषि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-इजरायल बिजनेस फोरम में ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (एक बूंद अधिक फसल) स्लोगन के साथ गुजरात का एग्रीकल्चरल विजन पेश किया। शायद यह पहली बार था, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात को कहा, जो आगे चलकर ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ का आधिकारिक आदर्श वाक्य बन गया। गुजरात डेलीगेशन की इंटरनल रिपोर्ट में बताया गया कि उनके प्रेजेंटेशन को ‘सबसे ज्यादा तालियां और तारीफ’ मिली।

11 साल बाद 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। मोदी आर्काइव में बताया गया है, “2006 में जो एग्रीकल्चर थीम चली थी, वह इस बार भी जारी रही।”

इसमें कहा गया है कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने तेल अवीव स्थित डेंजीगर फ्लावर फार्म (पुष्प उद्यान) का दौरा किया। यहां इजरायल की लीडिंग फ्लावर जेनेटिक्स कंपनी ने एक नया सफेद गुलदाउदी बनाया था और उसका नाम ‘मोदी’ रखा। फूलों की खेती इजरायल के सबसे एडवांस्ड एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट सेक्टर में से एक है। फ्लावर फार्म का दौरा इस बात का संकेत था कि इजरायली एग्रीकल्चरल इनोवेशन कहां तक पहुंच गया है।

इसमें आगे कहा गया है कि यात्रा के दौरान कृषि क्षेत्र में साइन किया गया 3-साल का वर्क प्रोग्राम उस पहल का औपचारिक संस्थानीकरण था, जिसकी शुरुआत बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से एग्रीटेक-2006 में की थी। ‘मोदी आर्काइव’ में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जिस रिलेशनशिप पर काम किया था, वह प्रधानमंत्री के तौर पर ‘सरकार-से-सरकार’ की रूपरेखा बन गई।

बाद में तेल अवीव में भारतीय प्रवासियों को अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में इजरायल का सहयोग भारत को दूसरी ग्रीन रेवोल्यूशन में मदद कर सकता है।

‘मोदी आर्काइव’ में कहा गया कि 2006 और 2017 की यात्राओं को जोड़ने वाली कड़ी कृषि और जल संसाधन प्रबंधन है। दोनों देश अलग-अलग दृष्टिकोणों से समान समस्याओं पर काम कर रहे थे। भारत के पास व्यापक पैमाना, कृषि भूमि और आवश्यकता थी। वहीं, इजरायल ने सीमाओं को तकनीक में बदलते हुए ड्रिप सिंचाई, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग और डीसैलिनेशन जैसे सिस्टम विकसित किए। मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 2006 में ही पहचान लिया था कि ये वही तकनीकें हैं जिनकी गुजरात और भारत को जरूरत है और वे प्रधानमंत्री के रूप में इसे राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनाने के लिए वापस आए।

इसमें कहा गया कि जब वे 2017 में पहुंचे तो कृषि सहयोग का एजेंडा राज्य यात्रा की तैयारी कर रहे अधिकारियों की ओर से अचानक तैयार नहीं किया गया था। इसकी रूपरेखा मई 2006 की एक दोपहर से ही बननी शुरू हो गई थी, जब मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने ‘एग्रीटेक-2006’ में एक हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रेजेंटेशन दी थी और इस विश्वास के साथ लौटे थे कि भारत और इजरायल मिलकर क्या बना सकते हैं।

9 साल के बाद फिर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर गए हैं। इस बार भी भारत-इजरायल का एजेंडा कृषि, जल प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।

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