February 27, 2026
Entertainment

कैनवास से कैमरे तक: पेंटर बनने निकले थे प्रकाश झा, किस्मत ने बना दिया फिल्ममेकर

From canvas to camera: Prakash Jha set out to become a painter, but fate made him a filmmaker.

27 फरवरी । राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित फिल्म निर्देशक प्रकाश झा आज भारतीय सिनेमा का एक बड़ा नाम हैं। वह मनोरंजन के साथ-साथ समाज को आईना वाली सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गंभीर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिन प्रकाश झा को आज हम सफल निर्देशक के रूप में जानते हैं, वे कभी ब्रश और रंगों की दुनिया में अपना भविष्य देख रहे थे। उनका सपना कैमरा नहीं, बल्कि कैनवास था। यही सपना उन्हें दिल्ली से मुंबई तक ले आया और वहीं से उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया।

प्रकाश झा का जन्म 27 फरवरी 1952 को बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में हुआ था। उनका बचपन गांव के माहौल में बीता। वह पढ़ाई में काफी अच्छे थे और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज में दाखिला लिया। वहां उन्होंने बीएससी की, लेकिन उनका झुकाव कला की ओर था। वह पेंटर बनना चाहते थे। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और मुंबई जाने का फैसला किया।

मुंबई पहुंचकर उन्होंने पेंटिंग सीखी और एक कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। इसी दौरान उन्हें फिल्म ‘धर्मा’ की शूटिंग देखने का मौका मिला। शूटिंग का माहौल, कैमरे की हलचल और कलाकारों का काम देखकर वे काफी प्रभावित हुए। उसी पल उन्होंने तय किया कि वे फिल्म बनाना सीखेंगे। इसके बाद उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला लिया। हालांकि, पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई, लेकिन उन्होंने जो सीखा, वही आगे चलकर उनके काम आया।

संघर्ष का समय उनके लिए आसान नहीं था। वे घर से केवल 300 रुपए लेकर निकले थे। पैसों की कमी के कारण उन्हें कई बार भूखा रहना पड़ा और फुटपाथ पर सोना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनानी शुरू कीं। उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘फेस ऑफ्टर द स्ट्राम’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला और यहीं से उनकी पहचान बनने लगी।

फिल्मों की बात करें तो उन्होंने 1984 में आई ‘हिप हिप हुर्रे’ से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद ‘दामुल’ ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। यह फिल्म बंधुआ मजदूरी पर आधारित थी और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। आगे चलकर उन्होंने ‘गंगाजल’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’ और ‘सत्याग्रह’ जैसी चर्चित फिल्में बनाईं। उनकी फिल्मों में राजनीति, भ्रष्टाचार और समाज की सच्चाई साफ दिखाई गई।

निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने 1985 में अभिनेत्री दीप्ति नवल से शादी की। दोनों ने एक बेटी को गोद लिया, जिसका नाम दिशा है। हालांकि, करीब 17 साल बाद दोनों ने अलग होने का फैसला किया।

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