July 27, 2026
National

बोकारो की छह साल से लापता किशोरी मामले में हाईकोर्ट सख्त, सीबीआई एसपी को किया तलब

High Court takes a stern view of the case involving a teenage girl from Bokaro missing for six years; summons CBI SP.

बोकारो जिले से छह वर्ष से लापता किशोरी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने जांच की धीमी प्रगति पर एक बार फिर गंभीर नाराजगी जताई है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और जांच की वर्तमान स्थिति का अवलोकन करने के बाद सीबीआई के एसपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर 2:15 बजे होगी। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सीआईडी और सीबीआई की ओर से जांच की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई। अदालत ने अब तक की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों का विस्तार से परीक्षण किया।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह जानना चाहा कि छह वर्ष बीत जाने के बावजूद किशोरी का अब तक पता क्यों नहीं चल सका और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सीबीआई के एसपी को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर जांच की प्रगति और आगे की कार्ययोजना से अवगत कराने का निर्देश दिया।

यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है, जहां 14 वर्षीय किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। घटना के बाद दर्ज प्राथमिकी की सुपरविजन रिपोर्ट में इसे अपहरण का मामला माना गया था। घटनास्थल के पास से किशोरी की साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिलने पर परिजनों ने झारखंड हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। इससे पहले 2 जुलाई को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले में प्रतिवादी बनाते हुए जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था।

अदालत ने सीबीआई और सीआईडी को आपसी समन्वय के साथ जांच आगे बढ़ाने तथा सीबीआई की तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग करने को कहा था। सुनवाई के दौरान सीआईडी ने अदालत को बताया था कि ई-केवाईसी मिलान के दौरान बिहार के गोपालगंज में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से करीब 90 प्रतिशत तक मेल खाता मिला था, लेकिन अंगूठे के निशान और अन्य पहचान संबंधी विवरण मेल नहीं खाने के कारण उसकी पुष्टि नहीं हो सकी। हाईकोर्ट पहले भी जांच में हो रही देरी पर चिंता जता चुका है।

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