हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने बुधवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और संस्थान की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा को बरकरार रखने की मांग की। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को कमजोर करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में सरकार का हस्तक्षेप न केवल वर्तमान शिक्षण समुदाय के अधिकारों पर हमला है, बल्कि उन सभी अग्रदूतों के बलिदान का भी अपमान है जिन्होंने इस संस्थान को प्रतिष्ठित बनाया है।
उन्होंने आगे कहा, “स्वायत्तता को कमजोर करना केवल प्रशासनिक शक्ति का अतिक्रमण नहीं है; यह संकाय की सामूहिक बौद्धिक क्षमता और पेशेवर गरिमा पर अविश्वास है। विश्वविद्यालय कोई सरकारी दफ्तर नहीं है जहाँ फाइलों के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। यह ज्ञान, अनुसंधान और लोकतांत्रिक संवाद का केंद्र है। अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद जैसे वैधानिक निकायों को दरकिनार करना और बाहरी नियंत्रण थोपना विश्वविद्यालय की आत्मा पर हमले के समान है।”
प्रोफेसर व्यास ने कहा, “हम जवाबदेही के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जवाबदेही के नाम पर अधीनता स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार की भूमिका नियंत्रण बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों को पर्याप्त बजट, आधुनिक प्रयोगशालाएं, अनुसंधान अनुदान, छात्रावास, खेल सुविधाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है।” उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमले नहीं रोके गए तो वे अपना विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे।


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