शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज सार्वजनिक विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह को एक कुशल मंत्री बताया और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु से सार्वजनिक विकास मंत्री द्वारा उठाए गए संदेहों को दूर करने का आग्रह किया। कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर विक्रमादित्य सिंह की टिप्पणियों से उपजे विवाद पर ठाकुर का रुख ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की प्रतिक्रिया से बिल्कुल विपरीत है, जिन्होंने मंत्री की कार्यकुशलता पर सवाल उठाया था। अनिरुद्ध सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि नौकरशाहों को दोष देना अपनी गलतियों को छिपाने जैसा है।
ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह को एक कुशल मंत्री बताते हुए भी उनके इस सामान्यीकृत बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “हम सामान्यीकृत बयान नहीं दे सकते। राज्य के बाहर के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य के अधिकारियों ने भी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुछ अधिकारी नकारात्मक दृष्टिकोण वाले हो सकते हैं, लेकिन वे कहीं से भी हो सकते हैं, जिनमें हमारे अपने राज्य के अधिकारी भी शामिल हैं।”
विक्रमादित्य सिंह ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को राज्य के हितों की कोई परवाह नहीं है। ठाकुर ने कहा, “सरकार के मुखिया के रूप में, मुख्यमंत्री को पीडब्ल्यूडी मंत्री द्वारा उठाए गए संदेहों को दूर करके इस मुद्दे को हल करना चाहिए।”
ठाकुर इकलौते मंत्री हैं जिन्होंने इस मामले पर विक्रमदित्य सिंह का कुछ हद तक समर्थन किया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और नगर एवं ग्रामीण योजना मंत्री राजेश धरमानी ने स्पष्ट किया कि यह सामान्य बयान स्वीकार्य नहीं है और यदि उन्हें कोई शिकायत है तो उन्हें इसे उचित मंच पर उठाना चाहिए था।

