हिमाचल प्रदेश के राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर एक संतुलित नीति बनाने की दिशा में काम कर रही है, जो वास्तविक कब्जेदारो के अधिकारों की रक्षा करते हुए पारिस्थितिक हितों की रक्षा करेगी।
राजस्व, वन और विधि विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित ढांचा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार एक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक नीति विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो पर्यावरण संबंधी प्राथमिकताओं और प्रभावित नागरिकों की चिंताओं दोनों को प्रतिबिंबित करे।
अतिरिक्त सचिव (राजस्व) अनिल चौहान की अध्यक्षता में एक उप-समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। वन और विधि विभागों के अधिकारी इसके सदस्य होंगे। समिति को सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का विस्तारपूर्वक अध्ययन करने और एक सप्ताह के भीतर नीति का मसौदा प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है।
नेगी ने दोहराया कि सरकार न्यायिक निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कल्याणकारी सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, पीसीसीएफ (एचओएफ) संजय सूद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

