पालमपुर में गुरुवार को भारी मानसूनी बारिश के पहले दौर ने शहर की मानसून तैयारियों में आई खामियों को उजागर कर दिया, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए, सड़कें जलमग्न हो गईं और आवासीय मकानों में पानी भर गया। गाद, प्लास्टिक कचरे और मलबे से भरी हुई उफनती हुई सड़क किनारे की नालियां बारिश के पानी को निकालने में विफल रहीं, जबकि अवरुद्ध प्राकृतिक जलमार्गों ने पानी को सड़कों और आवासीय इलाकों में धकेल दिया।
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा सीवरेज लाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदे जाने के कारण घरों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था, जिससे स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो गई थी। निवासियों ने बताया कि बारिश का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे घरेलू सामान क्षतिग्रस्त हो गया और व्यापक असुविधा हुई। उन्होंने नगर निगम पर आरोप लगाया कि बरसात के मौसम से पहले बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने मानसून से पहले नालियों और प्राकृतिक जलमार्गों की समय पर सफाई और गाद निकालने का काम नहीं किया। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ नगर अधिकारियों को बार-बार किए गए फोन का कोई जवाब नहीं मिला, जिससे प्रभावित परिवार अपने दम पर संघर्ष कर रहे थे।
इस घटना ने मानसून से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए नगर निगम की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचनाओं का जवाब देते हुए नगर आयुक्त नेत्र मेती ने कहा कि आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं और पूरे शहर में नालियों की सफाई के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के इंजीनियर स्वयं इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं और शाम तक अधिकांश नालियों के साफ होने की उम्मीद है।


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