September 20, 2026
National

एलयूसीसी चिट फंड घोटाला: सीबीआई ने 18 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

LUCC Chit Fund Scam: CBI files charge sheet against 18 accused.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) चिट फंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

देहरादून स्थित बीयूडीएस एक्ट की विशेष अदालत में 10 जुलाई को दाखिल इस चार्जशीट में समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट तथा एलयूसीसी सोसाइटी को आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), उत्तराखंड प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट और बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (बीयूडीएस) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

यह मामला उस समय सीबीआई को सौंपा गया था, जब वर्ष 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट की नैनीताल पीठ ने एलयूसीसी घोटाले से संबंधित राज्यभर में दर्ज सभी एफआईआर की जांच केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को मामला दर्ज कर उत्तराखंड के विभिन्न थानों में दर्ज 18 मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली।

जांच में सामने आया कि एलयूसीसी का पंजीकरण वर्ष 2012 में मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी के रूप में कराया गया था। वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने सोसायटी का प्रबंधन अपने हाथ में लिया और उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के माध्यम से कथित तौर पर बिना अनुमति वाली जमा योजनाएं संचालित कीं। एजेंसी का आरोप है कि सोसायटी के पास कोई वास्तविक लाभकारी व्यवसाय नहीं था और पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाई गई राशि से किया जाता था। सीबीआई ने इसे पोंजी स्कीम करार दिया है।

जांच के अनुसार, उत्तराखंड में एक लाख से अधिक निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करीब 800 करोड़ रुपए जमा कराए गए। हालांकि कुछ निवेशकों को आंशिक भुगतान किया गया, लेकिन कुल कथित धोखाधड़ी 400 करोड़ रुपए से अधिक की बताई गई है।

सीबीआई का दावा है कि समीर अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। उसने अपने सहयोगियों किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई में 10 शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए, जिनके जरिए निवेशकों का धन विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर उसका दुरुपयोग किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश भाग चुके हैं। उन्हें वापस लाने के लिए सीबीआई ने आवश्यक नोटिस और सर्कुलर जारी किए हैं।

एजेंसी ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों से जुड़ी 39 संपत्तियों की पहचान की है। इनमें से 29 संपत्तियों की अस्थायी कुर्की के आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष संपत्तियों पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

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