शिमला के सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने गुरुवार को लोकसभा को बताया कि नशे की लत बढ़ने के मामले में हिमाचल प्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। स्कूल सर्वेक्षणों और सरकारी कर्मचारियों में नशे की लत से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए कश्यप ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर इस समस्या को रोकने के लिए कदम उठाने में विफल रहने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि देवभूमि के नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश तेजी से नशे के चंगुल में फंसता जा रहा है। “पंजाब के बाद हिमाचल प्रदेश नशे की लत में दूसरे नंबर पर है। नशे की लत के कारण युवा अपनी ऊर्जा खो रहे हैं।
कश्यप ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कहा, “हाल ही में 204 स्कूलों में किए गए सर्वेक्षणों से पता चला है कि 9 प्रतिशत बच्चे इंजेक्शन लेते हैं। नशा मुक्ति केंद्रों में 35 प्रतिशत बच्चे चिट्टा के आदी हैं, जो हेरोइन से बना सिंथेटिक ड्रग है।”
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में अकेले शिमला में 473 मादक पदार्थ मामले दर्ज किए गए हैं तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत हिमाचल प्रदेश में दोषसिद्धि दर मात्र 27 प्रतिशत है।
कश्यप ने कहा, “प्रशासन भी नशीली दवाओं की समस्या से निपटने में असफल रहा है। राज्य सरकार के 60 कर्मचारी भी बिजली, शिक्षा और पुलिस विभागों में नशीली दवाएं लेते पाए गए और राज्य के मुखिया का कहना है कि छह महीने बाद कार्रवाई की जाएगी।”